धर्मनगरी वाराणसी (काशी): गंगा नदी के उफान पर फिलहाल ब्रेक जरूर लग गया है, लेकिन घाटों पर बाढ़ का असर और खतरा अभी भी पूरी तरह से बरकरार है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर स्थिर दर्ज किया गया, इसके बावजूद घाटों के जलमग्न होने और निचले इलाकों में पानी भरने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बिगड़ते हालात को देखते हुए जिला प्रशासन, जल पुलिस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें हाई अलर्ट मोड पर हैं तथा चौबीसों घंटे स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।
केंद्रीय जल आयोग (CWC) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 24 जुलाई (शुक्रवार) सुबह 8 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 61.05 मीटर मापा गया। हालांकि, गंगा का आधिकारिक चेतावनी स्तर 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर तय है, जिससे वर्तमान जलस्तर काफी नीचे है। इसके बावजूद, पिछले दिनों हुई पानी की बढ़ोतरी के कारण प्रसिद्ध घाटों के बीच का आपसी संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है। तटवर्ती क्षेत्रों, निचले हिस्सों और घाट किनारे स्थित कई पौराणिक मंदिर जलमग्न हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, नदी के प्रवाह में भारी मात्रा में बहकर आ रही जलकुंभी के कारण नौका संचालन में भी गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर जल पुलिस प्रभारी सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक लगातार गश्त की जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए जल पुलिस और NDRF की मोटरबोट्स एवं राहत दल तैनात किए गए हैं। लाउडस्पीकर के माध्यम से घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से लगातार यह अपील की जा रही है कि वे सुरक्षा घेरे को न लांघें और गहरे पानी में स्नान करने से बचें।
स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने का आग्रह किया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे जलस्तर में एक बार फिर उछाल आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित राहत व बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।
