रायपुर में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। खमतराई थाना क्षेत्र में 66 वर्षीय कारोबारी को ठगों ने करीब 44 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने जाल में फंसाए रखा। आरोपियों ने खुद को CBI अधिकारी और IPS अफसर बताकर कारोबारी को डराया कि उसके नाम से 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है।
जेल भेजने और परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार कराने की धमकी देकर ठगों ने कारोबारी से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 8.50 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। रकम जुटाने के लिए पीड़ित ने अपनी जमा-पूंजी के साथ सोने के जेवर तक बेच दिए।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर कारोबारी ने अपने छोटे भाई को पूरी कहानी बताई। इसके बाद परिजनों ने उन्हें साइबर ठगी का शिकार होने की जानकारी दी।
महिला के फोन से शुरू हुआ पूरा खेल
जानकारी के मुताबिक, पीड़ित देवसिंह साहू (66) उरकुरा के बजरंग नगर के रहने वाले हैं और किराना दुकान चलाते हैं।
18 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनके मोबाइल पर एक महिला का फोन आया। महिला ने कथित तौर पर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जानकारी दी और आदित्य नाम के व्यक्ति से बात कराई।
इसके बाद आदित्य ने देवसिंह से उनके परिवार, जमीन और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी हासिल की।
कुछ समय बाद बलराज सिंह नाम के व्यक्ति ने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए उनसे पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए प्रदीप सिंह नाम के व्यक्ति से बात कराई गई, जिसने खुद को IPS अधिकारी बताया।
यहीं से कारोबारी को कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसा लिया गया।
6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया
फर्जी अधिकारियों ने देवसिंह से कहा कि उनके नाम से करीब 6.80 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। आरोपियों ने कथित तौर पर दावा किया कि जांच के दौरान बैंक खाते में जमा रकम का मिलान किया जाएगा।
इसके लिए कारोबारी को अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
ठगों ने यह भी धमकी दी कि अगर उन्होंने निर्देश नहीं माने तो उनके खिलाफ CBI की कार्रवाई होगी और परिवार के सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा सकता है।
डर के कारण देवसिंह लगातार आरोपियों के निर्देशों का पालन करते रहे।
हर घंटे वीडियो कॉल पर रहने का दबाव
इस साइबर ठगी की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने कारोबारी को लगातार निगरानी में रखा।
उन्हें हर घंटे वीडियो कॉल पर अपडेट देने के लिए कहा जाता था। देवसिंह और उनकी पत्नी इंदु साहू को भी वीडियो कॉल पर आरोपियों के सामने बैठे रहने का दबाव बनाया जाता था।
इस तरह कारोबारी को करीब 44 दिनों तक यह विश्वास दिलाया गया कि वह किसी गंभीर आपराधिक मामले में फंस चुके हैं और CBI की जांच चल रही है।
9 बार में ट्रांसफर किए 8.50 लाख रुपए
4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच देवसिंह ने अलग-अलग खातों में 9 बार पैसे ट्रांसफर किए।
जांच के लिए पुलिस को दिए गए बैंक स्टेटमेंट के मुताबिक रकम कई खातों में भेजी गई। इनमें रिद्धिमा ऑटो और राकेश ट्रेडर्स के खातों में 2-2 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए।
इसके अलावा:
- यूको बैंक खाते में 1 लाख रुपए
- कैपवाइज ट्रेडिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड में 1 लाख रुपए
- कोटक महिंद्रा बैंक में 50 हजार रुपए
- गणेश भंडार में 1 लाख रुपए
- सृजन लाइफ मैनेजमेंट के खाते में 1 लाख रुपए
रकम ट्रांसफर कराने के लिए फोन-पे का इस्तेमाल किया गया।
जमा-पूंजी और जेवर बेचकर जुटाए पैसे
लगातार पैसों की मांग के कारण कारोबारी पर आर्थिक दबाव बढ़ता गया। ठगों ने कथित तौर पर ऐसा माहौल बना दिया था कि अगर वह पैसे नहीं देगा तो उसके और उसके परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो जाएगी।
इसी डर में देवसिंह ने अपनी जमा-पूंजी का इस्तेमाल किया। इसके अलावा पैसे जुटाने के लिए सोने के जेवर भी बेच दिए।
इसके बावजूद ठगों की पैसों की मांग बंद नहीं हुई।
छोटे भाई को बताई पूरी कहानी, तब खुला राज
3 अक्टूबर को लगातार बढ़ती परेशानी के बीच देवसिंह ने अपने छोटे भाई सुंदर लाल साहू को पूरी घटना के बारे में बताया।
भाई ने बातचीत सुनने के बाद समझाया कि यह किसी सरकारी एजेंसी की कार्रवाई नहीं, बल्कि साइबर ठगी का मामला हो सकता है।
इसके बाद 4 अक्टूबर को देवसिंह ने खमतराई थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने पुलिस को बैंक स्टेटमेंट, आरोपियों के साथ हुई चैट, मैसेज और पैसों के ट्रांजेक्शन से जुड़ी रसीदें भी उपलब्ध कराईं।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बैंक खातों और पैसों के ट्रांजेक्शन की जानकारी भी खंगाली जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में ठग पुलिस, CBI, ED, कोर्ट या अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल पर पूछताछ, गिरफ्तारी की धमकी और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जाता है।
ऐसी स्थिति में:
- किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें।
- पुलिस या किसी जांच एजेंसी के नाम पर वीडियो कॉल में डराया जाए तो घबराएं नहीं।
- OTP, PIN, बैंक पासवर्ड या निजी बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
- वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी रखने को कहा जाए तो इसे साइबर ठगी का बड़ा संकेत मानें।
- तुरंत परिवार के किसी भरोसेमंद व्यक्ति को पूरी जानकारी दें।
- बैंक ट्रांजेक्शन, फोन नंबर, चैट और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
- साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत 1930 पर शिकायत करें और पुलिस से संपर्क करें।
रायपुर का यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर ठग लोगों के डर और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल करके किस तरह उन्हें मानसिक दबाव में ले लेते हैं। किसी भी जांच एजेंसी के नाम पर फोन आए तो डरकर पैसे भेजने के बजाय उसकी सत्यता की पुष्टि करना सबसे जरूरी है।
