नई दिल्ली, पूर्व भारतीय क्रिकेटर मुनफ पटेल ने पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर की तारीफ की है। तारीफ करते हुए मुनफ पटेल ने उन्हें पागल भी बताया है, लेकिन उनकी पागलपंती का जिक्र मुनफ ने उनकी गेंदबाजी को लेकर किया है। मुनफ का कहना है कि जो गेंदबाज 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ज्यादा की गति से गेंदबाजी करता है, उसके लिए लंबे समय तक बने रहना मुश्किल होता है। करीब 15 साल तक शोएब अख्तर प्रोफेशनल क्रिकेट में एक्टिव रहे हैं।
मुनफ पटेल ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए बॉम्बे स्पोर्ट्स एक्सचेंज प्रोग्राम में कहा, “शोएब अख्तर को अलग क्रेडिट देता हूं। एशियन कंडीशन में अगर 15 साल 150kmph वाला कोई बंदा है खेल सकता है तो उसको अलग से सैल्यूट है। वो लाजबाव है, उसका जवाब नहीं है। 4-5 साल बाद तो उसने चलना शुरू किया है। दोनों घुटने उसके खत्म हो गए थे, लेकिन एक पागलपंती है कि मुझे भाई ये करना है। वो पागल आदमी ही कर सकता है। उसके अलावा कोई नहीं कर सकता।”
शोएब अख्तर का करियर जितना उनकी रफ्तार भरी गेंदबाजी के लिए जाना जाता है, उतना ही उनकी चोटों के लिए भी फेमस है। उनकी गेंदबाजी का एक्शन और शरीर पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव उनकी चोटों का मुख्य कारण था। घुटनों की समस्या सबसे गंभीर और स्थायी थी। पूरे करियर वे अपने घुटनों से परेशान रहे। शोएब ने कई साक्षात्कारों में बताया है कि उनके घुटने बचपन से ही कमजोर थे और वे 5-6 साल की उम्र तक ठीक से चल भी नहीं पाते थे। क्रॉनिक अर्थराइटिस की समस्या उनको थी। दोनों घुटनों में ‘डीजेनेरेटिव अर्थराइटिस’ की समस्या थी। इसके लिए सर्जरी भी उन्होंने कराई थी। एक नहीं, बल्कि कई बार उन्होंने सर्जरी कराई थी। वे अक्सर मैच से पहले अपने घुटनों से इंजेक्शन के जरिए फ्लूइड निकलवाते थे, ताकि खेल सकें। टोटल नी रिप्लेसमेंट भी वे अब करा चुके हैं।
शोएब अख्तर को रावलपिंडी एक्सप्रेस कहा जाता है। शोएब अख्तर ने 2003 विश्व कप के दौरान इंग्लैंड के खिलाफ 161.3 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंद फेंकी थी। यह आधिकारिक तौर पर क्रिकेट के इतिहास की सबसे तेज़ गेंद मानी जाती है। शोएब अख्तर के बाद ब्रेट ली और शॉन टैट का नाम आता है। इन दोनों ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों ने 161.1 किमी/घंटा की समान गति दर्ज की है। ब्रेट ली अपनी निरंतरता के लिए जाने जाते थे, जबकि शॉन टैट अपनी अपरंपरागत एक्शन के कारण अविश्वसनीय गति पैदा करते थे।
