‘खेत बचाओ अभियान’ एक जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा: चौहान

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नयी दिल्ली, उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल, मिट्टी की जांच, जैविक खाद को बढ़ावा देने के मकसद से केंद्रीय कृषि मंत्रालय का ‘खेत बचाओ अभियान’ एक जून से 30 जून तक देशभर में चलेगा। अभियान का लक्ष्य है कि खेत बचे, लागत संभले, मिट्टी सुधरे, किसान जागरूक बने और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित हो।

एक सरकारी विज्ञप्ति में शनिवार को यह जानकारी दी गयी। इसमें बताया गया है कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है।

इस अभियान की तैयारी के संबंध में श्री चौहन ने यहां एक उच्चस्तरीय बैठक लेकर अभियान का फोकस संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग, मौसम की चुनौती के मद्देनजर समय पर किसान सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी और योजनाओं के लाभ को सीधे गांव तक पहुंचाने पर रखने की बात कही।

श्री चौहान ने कहा कि जून महीने भर चलने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ को प्रभावी और परिणामकारी बनाने के लिए इसका फोकस खेत बचाने, लागत संतुलित करने और किसान को सही समय पर सही मार्गदर्शन देने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे तक नहीं, बल्कि पंचायत से लेकर राज्य और केंद्र तक साझी भागीदारी के मॉडल पर चलेगा।

उन्होंने सबसे खास बल इस बात पर दिया कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मिट्टी की जांच, संतुलित और सही मात्रा में खाद तथा अन्य कृषि आगतों के उपयोग के बारे में जागरूक करने, हरी खाद, जैविक और जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में बताने का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि आने वाले समय को लेकर जो मौसम संबंधी चिंता जताई जा रही है, उसके मद्देनजर किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी कि वे क्या करें, क्या न करें, कौन-सी फसल लें, कहाँ फसल विविधीकरण अपनाएं और कम पानी या जोखिम की स्थिति में कौन-से विकल्प बेहतर रहेंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत-स्तर पर किसान को स्थिति-विशेष के अनुरूप सलाह देना होगा।

बैठक में यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर इस अभियान को मजबूत आधार दिया जाएगा। पंचायत स्तर पर मशीनों का वितरण, योजनाओं का लाभ और जहां संभव हो वहां सरकारी कार्यक्रमों का प्रत्यक्ष लाभ भी इसी अभियान के अंतर्गत जोड़ा जायेगा।

श्री चौहान ने यह भी कहा कि अभियान को केवल विभागीय दायरे में सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया जाएगा और मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से भी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा, ताकि यह अभियान एक प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनसहभागिता का मजबूत मॉडल बन सके। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण अभियान को प्रारंभिक दिनों से ही राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय ऊर्जा देगा।

बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) को सभी सहभागी संस्थानों के लिए प्रमुख समन्वयक की भूमिका दी गई है। साढ़े 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं। अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें केवीके, कृषि परिषद के संस्थानों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। परिषद के संस्थानों और केवीके की 1150 से अधिक टीमें भी समानांतर रूप से काम करेंगी।

श्री सिंह ने कहा कि अभियान को केवल खाद प्रबंधन तक ही सीमित नहीं, बल्कि योजनाओं का लाभ भी खेत तक पहुंचाया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान से छूटे लाभार्थियों को जोड़ना, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम, कॉटन मिशन, संतुलित पोषण, मिट्टी स्वास्थ्य, जल-संरक्षण और क्षेत्र-विशेष कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को समन्वित रूप में जोड़ने का दृष्टिकोण अभियान को बहुउद्देशीय और प्रभावी बनाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बैठक में कहा कि अभियान की सफलता की कुंजी यही है कि संदेश व्यावहारिक हो, जमीन पर दिखे और स्थानीय संरचना उससे जुड़ी हो। इसलिए फर्टिलाइजर के कम और संतुलित उपयोग, मौसम के अनुरूप खेती की सलाह, पंचायत-स्तर की सक्रियता, मशीनरी और योजनाओं के लाभ का समावेश तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी, इन बुनियादी बिंदुओं पर अभियान के दौरान ध्यान रखा जाए।

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