TB मुक्त भारत अभियान को मिली नई ताकत, 55 जिलों में JOSH टीमें लॉन्च; युवाओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी

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नई दिल्ली। देश को टीबी मुक्त बनाने की मुहिम को अब युवाओं की ताकत से और गति देने की तैयारी है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत JOSH (Joint Squad for Health) टीमों की शुरुआत की। इस पहल का मकसद टीबी के खिलाफ जागरूकता, शुरुआती पहचान और समय पर इलाज को लेकर लोगों तक सीधे पहुंच बनाना है।

सरकार का जोर अब टीबी की लड़ाई को केवल अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय गांवों, कस्बों और शहरी इलाकों के समुदायों तक ले जाने पर है। JOSH टीमों में युवाओं को शामिल करके स्थानीय स्तर पर लोगों के साथ संवाद बढ़ाने की रणनीति अपनाई गई है।

55 जिलों से शुरू हुआ अभियान

JOSH टीमों को पहले चरण में 11 राज्यों के 55 जिलों में तैनात किया जाएगा। इन टीमों में प्रथम श्रेणी के अधिकारी, MY Bharat के स्वयंसेवक और राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी NCC के कैडेट शामिल होंगे।

इनका मुख्य उद्देश्य लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच, इलाज और बचाव के बारे में सही जानकारी देना होगा। साथ ही मरीजों को लेकर समाज में मौजूद गलत धारणाओं और भेदभाव को कम करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

तीन मंत्रालय मिलकर करेंगे काम

JOSH पहल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सहयोग से शुरू किया गया है।

इसका उद्देश्य अलग-अलग सरकारी संस्थाओं की क्षमताओं को एक मंच पर लाकर टीबी उन्मूलन अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है।

सरकार इसे ‘संपूर्ण सरकार और संपूर्ण समाज’ के दृष्टिकोण से जोड़कर देख रही है। यानी टीबी के खिलाफ लड़ाई में केवल सरकारी स्वास्थ्य तंत्र ही नहीं, बल्कि युवा, स्वयंसेवक, स्थानीय प्रशासन और समुदाय भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

क्या काम करेंगी JOSH टीमें?

JOSH टीमों की जिम्मेदारी केवल लोगों को टीबी के बारे में जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगी। टीमों के जरिए समुदाय के बीच जाकर कई महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाए जाएंगे।

  • टीबी के संभावित लक्षणों के बारे में जानकारी देना
  • समय पर जांच कराने के लिए लोगों को प्रेरित करना
  • उपचार शुरू होने के बाद दवाओं का पूरा कोर्स लेने की जानकारी देना
  • टीबी से जुड़े भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करना
  • मरीजों के प्रति सामाजिक भेदभाव कम करना
  • स्थानीय समुदाय को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ना

टीमों की गतिविधियां ब्लॉक, वार्ड और सामुदायिक स्तर पर केंद्रित रहेंगी। इससे स्वास्थ्य संबंधी संदेश सीधे लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

टीबी के इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना और कमजोरी इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं।

हालांकि, ऐसे लक्षण दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी का निष्कर्ष निकालने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

समय पर टीबी की पहचान होने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार पूरा करने से बीमारी के इलाज में मदद मिलती है। वहीं, बीमारी को लेकर सामाजिक डर और गलत धारणाएं मरीजों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती हैं।

युवाओं को बनाया गया अभियान का चेहरा

JOSH पहल में युवाओं की भूमिका को खास महत्व दिया गया है। MY Bharat स्वयंसेवक और NCC कैडेट स्थानीय लोगों के बीच जाकर टीबी से जुड़े स्वास्थ्य संदेशों को पहुंचाएंगे।

युवा वर्ग का स्थानीय समुदायों के साथ सीधा संपर्क इस अभियान को व्यापक बनाने में मदद कर सकता है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां लोग जागरूकता की कमी या सामाजिक झिझक के कारण समय पर जांच नहीं करा पाते।

67,933 पंचायतों को मिल चुका है TB मुक्त दर्जा

टीबी उन्मूलन अभियान के तहत स्थानीय स्तर पर हासिल उपलब्धियों को भी कार्यक्रम में रेखांकित किया गया। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 697 जिलों की 67,933 पंचायतों को टीबी मुक्त के रूप में मान्यता दी गई है।

सरकार के मुताबिक इस तरह की उपलब्धियों में स्थानीय नेतृत्व, स्वास्थ्यकर्मियों और समुदाय की भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। JOSH टीमों के जरिए इसी सामुदायिक भागीदारी को और मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।

AI चैटबॉट से भी बढ़ेगी जागरूकता

राष्ट्रीय कार्यक्रम में टीबी मुक्त भारत अभियान से जुड़ी उपलब्धियों पर वीडियो और नई सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री भी प्रस्तुत की गई। इसके अलावा जनजागरूकता और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने के लिए AI आधारित ‘खुशी अवतार’ चैटबॉट की शुरुआत भी कार्यक्रम का हिस्सा रही।

इस तरह तकनीक, युवा शक्ति और सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को एक साथ जोड़कर टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने की कोशिश की जा रही है।

जनभागीदारी पर सरकार का जोर

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने टीबी के खिलाफ लड़ाई में जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया। सरकार का मानना है कि टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है।

JOSH टीमों की शुरुआत इसी सोच को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक कदम है। पहले चरण में 55 जिलों से शुरू होने वाली यह पहल लोगों को टीबी के लक्षण पहचानने, समय पर जांच कराने और इलाज को नियमित रूप से पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।

आने वाले समय में इस पहल का प्रभाव इस बात से भी देखा जाएगा कि स्थानीय स्तर पर टीबी की जांच, उपचार और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों में कितनी बढ़ोतरी होती है। युवाओं को अभियान से जोड़कर TB मुक्त भारत की मुहिम को समुदाय के और करीब ले जाने की कोशिश की गई है।

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