नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शिंजो आबे के साथ अपनी पुरानी मित्रता को याद किया और भारत-जापान संबंधों को मजबूत बनाने में उनके योगदान का उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि अकी आबे का भारत के साथ लंबे समय से जुड़ाव रहा है और वह इस रिश्ते को विशेष महत्व देते हैं।
प्रधानमंत्री ने शिंजो आबे को भारत का करीबी मित्र और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने भारत और जापान के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
काशी में शिंजो आबे की यादों को मिला सम्मान
वाराणसी में शिंजो आबे की स्मृति से जुड़ा आबे मेमोरियल कॉरिडोर स्थापित किया गया है। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अकी आबे ने इसका संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
कॉरिडोर में शिंजो आबे की भारत यात्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकातों और काशी से जुड़े महत्वपूर्ण पलों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। इसका उद्देश्य भारत-जापान संबंधों की ऐतिहासिक यात्रा और शिंजो आबे के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
अकी आबे ने कॉरिडोर में अपने पति से जुड़ी यादों को देखा तो वह भावुक हो गईं। उन्होंने भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
2015 में PM मोदी के साथ काशी आए थे आबे
शिंजो आबे दिसंबर 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वाराणसी पहुंचे थे। इस दौरान दोनों नेताओं ने दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में हिस्सा लिया था।
काशी की इस यात्रा को भारत-जापान के सांस्कृतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया। अकी आबे ने भी अपने संबोधन में शिंजो आबे की इस यात्रा और काशी से उनके जुड़ाव की यादों का उल्लेख किया।
काशी और जापान के क्योटो के बीच सांस्कृतिक समानताओं का भी इस दौरान जिक्र हुआ। दोनों शहर अपनी प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाने जाते हैं।
रुद्राक्ष सेंटर से भी जुड़ी है मोदी-आबे की दोस्ती
वाराणसी का रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भी भारत-जापान सहयोग की महत्वपूर्ण निशानी है। इसका निर्माण जापान के सहयोग से हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2021 में इसका उद्घाटन किया था।
रुद्राक्ष सेंटर की खासियत यह है कि इसकी वास्तुकला में भारतीय और जापानी संस्कृति की झलक दिखाई देती है। भवन के बाहरी हिस्से में 108 रुद्राक्ष के प्रतीक बनाए गए हैं।
इस परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पहले भी शिंजो आबे के योगदान का उल्लेख कर चुके हैं। दोनों नेताओं के बीच काशी में इस तरह की परियोजना को लेकर बातचीत हुई थी और बाद में इसे आगे बढ़ाया गया।
भारत-जापान संबंधों में आबे की अहम भूमिका
शिंजो आबे के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत और जापान के बीच संबंधों में कई क्षेत्रों में विस्तार हुआ। रणनीतिक सहयोग के साथ आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढांचे और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी आगे बढ़ी।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत और जापान के तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा औद्योगिक गलियारों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी जापानी सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।
भारत और जापान के रिश्तों में शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत मित्रता को भी एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जाता है। दोनों नेताओं की कई मुलाकातों और बातचीत ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
योगी आदित्यनाथ ने भी याद किया मोदी-आबे का रिश्ता
आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत और जापान के संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और शिंजो आबे के बीच संबंधों को याद करते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को रेखांकित किया।
कॉरिडोर में मौजूद तस्वीरें शिंजो आबे की भारत यात्राओं, काशी से उनके जुड़ाव और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकातों की यादों को सामने लाती हैं।
आने वाली पीढ़ियों के लिए यादगार बनेगा कॉरिडोर
शिंजो आबे का जुलाई 2022 में निधन हुआ था। इसके बाद भारत में भी उनके योगदान और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके संबंधों को याद किया गया।
वाराणसी में स्थापित आबे मेमोरियल कॉरिडोर उनके भारत से जुड़े संबंधों और काशी यात्रा की यादों को संरक्षित करने का एक माध्यम है। यहां आने वाले लोग तस्वीरों और प्रदर्शित सामग्री के जरिए भारत-जापान संबंधों के एक महत्वपूर्ण दौर से परिचित हो सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी की अकी आबे से मुलाकात ने एक बार फिर शिंजो आबे की विरासत और भारत-जापान मित्रता से जुड़े उस अध्याय को चर्चा में ला दिया है, जिसमें काशी का विशेष स्थान रहा है।
आबे मेमोरियल कॉरिडोर भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक, कूटनीतिक और मानवीय संबंधों की याद दिलाता है। शिंजो आबे से जुड़ी काशी की स्मृतियां अब इस कॉरिडोर के जरिए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेंगी।
