बंगाल की सियासत: हिंसा पीड़ित परिवारों को नौकरी का वादा, शुभेंदु अधिकारी ने किया ऐलान

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पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में पिछले 25 सालों के दौरान चुनावी और चुनाव के बाद हुई राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के पात्र परिजनों को सरकारी नौकरी देने की योजना बना रही है।न्यूज18 के मुताबक, राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ से जुड़े सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित नीति के तहत पीड़ित परिवार के एक पात्र सदस्य को सरकारी रोजगार देने पर विचार किया जाएगा। इस योजना के दायरे में लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनावों के दौरान या उनके बाद हुई हिंसा में जान गंवाने वालों के परिवारों को शामिल किया जाएगा।
2021 और 2019 के पीड़ित परिवार भी होंगे शामिल

सरकार की इस पहल में पिछले ढाई दशकों के दौरान हुए सभी प्रमुख चुनावों को कवर किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से चुनाव के बाद हुई हिंसा में मारे गए लोगों के पीड़ित परिवार।

इसके अलावा 2019 लोकसभा चुनाव के बाद हिंसा से प्रभावित परिवार। राज्य में समय-समय पर हुए स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसक झड़पों के शिकार हुए लोग भी इसमें शामिल होंगे।
कैसे काम करेगी आवेदन प्रक्रिया?

सूत्रों के मुताबिक, योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार जल्द ही एक आधिकारिक विज्ञापन जारी करेगी।

विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद प्रभावित परिवारों को अपने-अपने जिला प्रशासन के माध्यम से आवेदन करना होगा।

आवेदकों को अपने परिवार के सदस्य की मौत की परिस्थितियों, घटना की तारीख, स्थान और घटना कैसे हुई—इसकी पूरी जानकारी और दस्तावेज देने होंगे।

जिला प्रशासन और सरकारी अधिकारियों की एक टीम आवेदनों की गहन जांच और दावों का भौतिक सत्यापन करेगी। जांच सही पाए जाने पर ही परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी का नियुक्ति पत्र दिया जाएगा।
कैबिनेट और कानून विभाग से मिली हरी झंडी

राज्य सचिवालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने पुष्टि की है कि इस नीतिगत प्रस्ताव को पश्चिम बंगाल कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा, राज्य के कानून विभाग ने भी इस योजना को हरी झंडी दे दी है।

गंभीर राजनीतिक हिंसा के दंश को झेल चुके परिवारों को आर्थिक राहत और सहारा देने के मकसद से लाई जा रही इस योजना का औपचारिक ऐलान सरकार की ओर से बहुत जल्द किए जाने की उम्मीद है।

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