सोने की कीमतों में इस साल की शुरुआत से अब तक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जनवरी में इंटरनेशनल मार्केट में करीब 5,595 डॉलर प्रति आउंस के स्तर तक पहुंचने वाला गोल्ड अब लगभग 4,100–4,136 डॉलर प्रति आउंस के आसपास कारोबार कर रहा है। यानी जनवरी के उच्चतम स्तर की तुलना में सोने की कीमत करीब 26 प्रतिशत नीचे आ चुकी है।
सोने में आई इस तेज गिरावट ने उन निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ा दी है, जो लंबे समय से कीमतों में करेक्शन का इंतजार कर रहे थे। वहीं, दिवाली और त्योहारी सीजन से पहले ज्वैलरी खरीदने वालों के सामने भी सवाल है कि क्या मौजूदा भाव खरीदारी के लिए सही हैं या सोने की कीमतों में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है?
अभी कितना है Gold Price?
मौजूदा समय में इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड करीब 4,136 डॉलर प्रति आउंस के आसपास बताया जा रहा है। वहीं, भारतीय बाजार में MCX Gold करीब 1.50 लाख रुपये के स्तर पर है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल कीमत में आई गिरावट देखकर पूरी रकम एक साथ निवेश करना उचित रणनीति नहीं हो सकती। आने वाले समय में गोल्ड में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
तीन हफ्ते में करीब 10% गिरा सोना
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कायनात चैनवाला के अनुसार, सितंबर के मध्य में गोल्ड करीब 4,700 डॉलर से गिरकर लगभग 4,250 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर आ गया था। इस दौरान करीब तीन सप्ताह में सोने की कीमत में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
यह गिरावट बताती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिलहाल सोने पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा दांव लगाने के बजाय बाजार की दिशा पर नजर रखनी चाहिए।
दिवाली से पहले सोना खरीदना चाहिए या नहीं?
दिवाली के दौरान भारत में सोने और ज्वैलरी की खरीदारी बढ़ जाती है। च्वाइस ब्रोकिंग की कावेरी मोरे के अनुसार, अगर खरीदारी जरूरत या त्योहार के लिए है तो निवेशक अपनी आवश्यकता के हिसाब से ज्वैलरी खरीद सकते हैं।
वहीं, अगर उद्देश्य सिर्फ निवेश है तो Gold ETF एक विकल्प हो सकता है। इसमें निवेशक को ज्वैलरी की तरह मेकिंग चार्ज का सामना नहीं करना पड़ता और इसे खरीदना-बेचना अपेक्षाकृत सुविधाजनक होता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सोने की कीमतों में अभी और उतार-चढ़ाव संभव है।
क्या 3,950 डॉलर तक गिर सकता है Gold Price?
कावेरी मोरे के अनुसार, स्थिरता आने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 3,950 डॉलर प्रति आउंस तक जा सकती है। इसका मतलब है कि मौजूदा स्तर से भी कुछ और गिरावट का जोखिम बना हुआ है।
इसलिए अगर कोई निवेशक गोल्ड में पैसा लगाने की तैयारी कर रहा है तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना जोखिम को कुछ हद तक कम करने की रणनीति हो सकती है।
ध्यान रखें: गोल्ड में भी शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए जिस पैसे की जरूरत निकट भविष्य में होने वाली है, उसे केवल कीमत गिरने के कारण गोल्ड में निवेश करना उचित नहीं माना जाता।
Tata Mutual Funds की रिपोर्ट क्या कहती है?
Tata Mutual Funds की रिपोर्ट के अनुसार, जिन निवेशकों ने सोने में पहले आई तेजी का फायदा नहीं उठाया, उनके लिए मौजूदा स्तर साल की शुरुआत की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर एंट्री प्वाइंट हो सकता है।
मध्यम अवधि में गोल्ड को कई ऐसे कारकों से सपोर्ट मिल सकता है, जिनमें सेंट्रल बैंक की खरीदारी, फिस्कल रिस्क और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता शामिल हैं।
यानी छोटी अवधि में भले ही कीमतों में दबाव दिखाई दे रहा हो, लेकिन मध्यम अवधि के नजरिए से गोल्ड की मांग को लेकर पूरी तस्वीर कमजोर नहीं है।
सोने की कीमत क्यों गिरी?
सोने की कीमतों पर कई वैश्विक आर्थिक कारकों का असर पड़ता है। जब ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी होती है तो निवेशकों का रुझान सोने से हटकर ब्याज देने वाली संपत्तियों की ओर जा सकता है।
मौजूदा गिरावट के पीछे प्रमुख कारणों में ये कारक बताए जा रहे हैं—
- अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव
- बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
- महंगाई से जुड़ी चिंताएं
- डॉलर और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव
- निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव
इन परिस्थितियों के कारण गोल्ड में तेज करेक्शन देखने को मिला है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति हो सकती है?
मौजूदा Gold Price को देखते हुए निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभी पूरा निवेश किया जाए या थोड़ा इंतजार किया जाए। एक्सपर्ट राय से संकेत मिलता है कि दोनों ही मामलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी है।
अगर ज्वैलरी खरीदना आपकी जरूरत है, तो त्योहारी सीजन में खरीदारी की जा सकती है। लेकिन केवल निवेश के नजरिए से गोल्ड खरीदने वालों के लिए चरणबद्ध निवेश और लंबी अवधि का नजरिया ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।
कुल मिलाकर, जनवरी के मुकाबले सोने की कीमत में करीब 26 प्रतिशत की गिरावट ने निश्चित रूप से निवेशकों के लिए एक नया अवसर पैदा किया है, लेकिन इसे बिना जोखिम वाला मौका नहीं माना जा सकता। अगर कीमत 3,950 डॉलर के स्तर तक पहुंचती है, तो मौजूदा भाव से और करेक्शन की संभावना बनी रहेगी।
इसलिए दिवाली से पहले गोल्ड खरीदने वालों को अपनी जरूरत, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए। सिर्फ इसलिए निवेश न करें कि सोना पहले से सस्ता हो गया है।
