यूपी में भाजपा की पदयात्रा से गरमाई सियासत, राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक पर साधा निशाना

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। मंगलवार को पार्टी ने प्रदेशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा अभियान की शुरुआत की। इस दौरान राजधानी लखनऊ से लेकर बरेली समेत कई प्रमुख शहरों में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ देखने को मिली।

लखनऊ में इस पदयात्रा का नेतृत्व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। लोकभवन से केडी सिंह बाबू स्टेडियम और परिवर्तन चौक की ओर निकली इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। उनके हाथों में भाजपा के झंडे और लोकतंत्र बचाने से जुड़े पोस्टर नजर आए।

पदयात्रा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उनके बयानों ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

पीएम मोदी को बताया भगवान का वरदान

लखनऊ में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश के मुकुट मणि हैं और भगवान का वरदान हैं।

शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, प्रधानमंत्री के साथ देश के करोड़ों नागरिकों का विश्वास और समर्थन जुड़ा हुआ है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह चुनावी मैदान में प्रधानमंत्री मोदी का मुकाबला नहीं कर पा रहा है, इसलिए देश में अराजकता और षड्यंत्र का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की बात करने वाली कांग्रेस का अपना इतिहास आपातकाल से जुड़ा हुआ है।

राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला

शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाया था। अब वही पार्टी लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसके मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाजपा की यह पदयात्रा लोकतंत्र की मजबूती और देश में अराजकता समाप्त करने के संकल्प के साथ निकाली जा रही है।

अखिलेश यादव को लेकर शिवराज का बड़ा बयान

पदयात्रा के दौरान शिवराज सिंह चौहान का सबसे चर्चित बयान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर रहा।

उन्होंने वोटर लिस्ट में एक व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज होने का मुद्दा उठाया। शिवराज ने सवाल किया कि यदि किसी मतदाता का नाम दो जगह दर्ज है, तो एक स्थान से नाम हटाने में आखिर क्या परेशानी है?

उन्होंने अखिलेश यादव से इस मुद्दे पर जवाब मांगा और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल खड़े किए।

इसके बाद उन्होंने राजनीतिक अंदाज में अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा, ‘फरवरी में निपट जाओगे अखिलेश बाबू।’

उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज होने के आसार हैं।

देश को तीन बार बांटने की कोशिश का लगाया आरोप

शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में देश के विभाजन और राजनीतिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश को अलग-अलग समय पर बांटने की कोशिशें हुई हैं। उन्होंने तीन घटनाओं का जिक्र किया:

  • 1905: लॉर्ड कर्जन के समय बंगाल विभाजन।
  • 1947: भारत का विभाजन और पाकिस्तान का गठन।
  • वर्तमान राजनीतिक दौर: कांग्रेस, INDIA गठबंधन और समाजवादी पार्टी पर अराजकता फैलाने की कोशिश का आरोप।

शिवराज सिंह ने कहा कि विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहे हैं, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

लखनऊ और बरेली में सड़कों पर उतरे हजारों कार्यकर्ता

भाजपा के इस प्रदेशव्यापी अभियान के पहले दिन लखनऊ और बरेली समेत कई शहरों में पदयात्राएं निकाली गईं। दी गई जानकारी के अनुसार, इन कार्यक्रमों में 50 हजार से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक सड़कों पर उतरे।

कार्यकर्ताओं ने हाथों में पार्टी के झंडे और ‘लोकतंत्र बचाओ’ के संदेश वाले पोस्टर लेकर मार्च किया।

इस अभियान के जरिए भाजपा ने प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को धार देने और विपक्ष के खिलाफ जनसमर्थन जुटाने का प्रयास किया है।

यूपी की राजनीति में बढ़ेगी बयानबाजी?

उत्तर प्रदेश में भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला लगातार चर्चा में बना हुआ है। ऐसे में शिवराज सिंह चौहान के बयान को भाजपा के राजनीतिक अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

एक तरफ भाजपा लोकतंत्र और मतदाता सूची के मुद्दे को लेकर विपक्ष पर हमलावर है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर सरकार पर सवाल उठाते रहे हैं।

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