ब्रिक्स में मोदी का बड़ा संदेश: UNSC सुधार पर जल्द फैसला, नाविकों की सुरक्षा के लिए बनेगा इमरजेंसी नेटवर्क

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नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की भागीदारी को लेकर भारत का रुख मजबूती से रखा। उन्होंने ब्रिक्स देशों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया पर जल्द निर्णय लेने की अपील की। साथ ही समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों को देखते हुए नाविकों की सुरक्षा के लिए एक आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया में वैश्विक संस्थाओं को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत है। भारत का मानना है कि विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी मिलनी चाहिए।

‘भविष्य साझा है तो अधिकार भी साझा होना चाहिए’

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदेश को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि यदि दुनिया का भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। उनके इस संदेश का सीधा अर्थ वैश्विक संस्थाओं में अधिक लोकतांत्रिक और संतुलित प्रतिनिधित्व से जुड़ा है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में कई बड़े बदलाव हो चुके हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की संरचना में उन बदलावों का पर्याप्त प्रतिबिंब नहीं दिखाई देता।

भारत ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार पर जल्द फैसला।
  • वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की समान भागीदारी।
  • अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाना।
  • समुद्री मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना।
  • नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क तैयार करना।

समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे की चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में समुद्री सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मुद्दे के तौर पर उठाया। समुद्री रास्ते दुनिया के व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ हैं। इन मार्गों पर किसी भी तरह का संकट अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधा असर डाल सकता है।

ऐसे में भारत ने नाविकों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क बनाने का आह्वान किया है। इस तरह का नेटवर्क संकट के समय नाविकों तक तेजी से सहायता पहुंचाने और विभिन्न देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मददगार हो सकता है।

समुद्री सुरक्षा का मुद्दा केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। समुद्री मार्गों पर असुरक्षा से ऊर्जा आपूर्ति, आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही और वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।

विकासशील देशों की आवाज को मिले ताकत

ब्रिक्स मंच से भारत ने विकासशील देशों की भूमिका को लेकर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया। भारत चाहता है कि जिन देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, उन्हें अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भी उचित प्रतिनिधित्व मिले।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और आर्थिक स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं।

यदि निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ती है, तो वैश्विक नीतियों में अलग-अलग क्षेत्रों और अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सकता है।

ब्रिक्स की भूमिका भी हुई अहम

ब्रिक्स अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है। वैश्विक राजनीति और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार को लेकर भी इसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

भारत चाहता है कि ब्रिक्स के सदस्य देश वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों की भागीदारी और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करें।

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से भारत की प्राथमिकताएं स्पष्ट नजर आईं—एक ऐसी वैश्विक व्यवस्था, जिसमें अधिक देशों की आवाज सुनी जाए और साझा चुनौतियों के समाधान के लिए साझा प्रयास हों।

मोदी के संदेश का व्यापक असर

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की ओर से उठाए गए मुद्दे आने वाले समय में वैश्विक संस्थाओं में सुधार की बहस को नई दिशा दे सकते हैं। खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा भारत के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है।

वहीं, नाविकों की सुरक्षा के लिए आपातकालीन नेटवर्क का प्रस्ताव समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बन सकता है।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स मंच से स्पष्ट संदेश दिया कि बदलती दुनिया में वैश्विक संस्थाओं की व्यवस्था भी बदलनी चाहिए। भारत का जोर ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर है जिसमें विकासशील देशों को निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिले और समुद्री मार्गों समेत वैश्विक सुरक्षा से जुड़े खतरों का मिलकर मुकाबला किया जा सके।

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