नई दिल्ली में आयोजित हो रहे BRICS Summit 2026 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात करीब 45 मिनट तक चली। बैठक में भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने के साथ व्यापार, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को भारत पहुंचे। इसके बाद उनकी प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की बैठक ऐसे समय में हुई है, जब भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
45 मिनट की बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
मोदी-पुतिन मुलाकात को भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। बैठक में दोनों देशों के बीच आर्थिक और कारोबारी रिश्तों को और विस्तार देने पर जोर रहा।
सूत्रों के मुताबिक, बातचीत में प्रमुख रूप से इन मुद्दों पर चर्चा हुई—
- भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ाने की संभावनाएं।
- 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य।
- परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना।
- भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में पहुंच आसान बनाना।
- रूस में भारतीय कुशल कामगारों की संख्या बढ़ाने पर सहयोग।
- जरूरी खनिज और उर्वरक आपूर्ति को मजबूत करना।
- रेलवे और सुरंग निर्माण जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में सहयोग।
- दोनों देशों के उद्योगों और कंपनियों के बीच नए कारोबारी अवसर तैयार करना।
रक्षा क्षेत्र में भी बड़ा अपडेट
बैठक से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भारत-रूस रक्षा सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नयन पर विचार कर रहे हैं।
इसके साथ ही रूस अपनी शेष S-400 मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रस्तावित सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति को लेकर भी चर्चा चल रही है।
इससे साफ है कि भारत और रूस के रिश्तों में आर्थिक सहयोग के साथ रक्षा साझेदारी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
मोदी ने पुतिन को दिया खास तोहफा
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल के रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण की एक प्रति भेंट की।
यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच लगातार संवाद का हिस्सा है। इससे पहले दोनों की मुलाकात बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
उस मुलाकात में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को जल्द खत्म करने की अपील की थी और युद्ध को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी।
BRICS Summit में चीन की भी अहम भूमिका
इस बार ब्रिक्स सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय है। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं।
भारत और चीन के बीच गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव रहा है। ऐसे में BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर भी पूरी दुनिया की नजर है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि शी जिनपिंग सम्मेलन में शामिल होंगे और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर वैश्विक नेताओं के साथ चर्चा करेंगे।
BRICS में आर्थिक सहयोग पर भारत का जोर
BRICS बिजनेस फोरम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्य और साझेदार देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने तथा भुगतान प्रणालियों को जोड़ने की अपील की।
उन्होंने BRICS देशों के बीच डिजिटल व्यापार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आ रही चुनौतियों, निष्पक्ष बाजार व्यवस्था और व्यापारिक संबंधों में विविधता की जरूरत पर बात की।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
18वें BRICS Summit को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है।
- दिल्ली पुलिस के करीब 15,000 जवान तैनात हैं।
- अर्धसैनिक बलों की करीब 200 कंपनियां सुरक्षा में लगाई गई हैं।
- राजधानी में निगरानी के लिए करीब 500 CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
- VVIP काफिलों के दौरान कुछ रास्तों पर अस्थायी रोक या डायवर्जन किया जा सकता है।
- दिल्ली मेट्रो को आम यात्रियों के लिए चालू रखा गया है।
सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेता नई दिल्ली में मौजूद रहेंगे।
आगे भी होंगी कई अहम द्विपक्षीय बैठकें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का BRICS Summit से पहले और सम्मेलन के दौरान कई विदेशी नेताओं के साथ संवाद का कार्यक्रम है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन के अलावा ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ भी उनकी बैठकें होनी हैं।
कुल मिलाकर, मोदी-पुतिन की 45 मिनट की बैठक ने BRICS Summit 2026 के दौरान भारत-रूस संबंधों को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। व्यापार से लेकर रक्षा और परमाणु ऊर्जा तक, दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश इस मुलाकात में साफ नजर आई।
