सफेद दाग की बीमारी आजकल बेहद आम हो चुकी है। 11-12 साल के बच्चों को भी ये बीमारी हो रही है और कई लोग आज भी उन्हें अजीब नजर से देखते हैं। साइंस के मुताबिक, सफेद दाग होना कोई बीमारी नहीं बल्कि एक कंडीशन है। आम भाषा में कहा जाए तो विटिलिगो एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम से जुड़ा हुआ होता है। दिल्ली की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. चांदनी जैन गुप्ता ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि ये अब कोई बड़ी बीमारी नहीं रही लेकिन लोग इसके प्रति आज भी कम जागरुक है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर सफेद दाग बच्चों में क्यों बढ़ रहा है और इसके शुरुआती लक्षण सबसे पहले किन अंगों पर नजर आते हैं।
क्यों होता है विटिलिगो
विटिलिगो को हिंदी में सफेद दाग कहते हैं। त्वचा में मौजूद मेलानोसायट्स (Melanocytes) सेल्स, जो स्किन का कलर तय करती हैं, वह या तो नष्ट हो जाती हैं या काम करना बंद कर देती हैं। इसी वजह से शरीर के कई हिस्सों पर सफेद दाग होना शुरू हो जाते हैं। इसमें न तो किसी तरह का दर्द होता है और न ही जलन, बस त्वचा का रंग सफेद और भूरे दो हिस्सों में बंट जाता है। इसका वैसे तो किसी तरह का कोई असर नहीं होता लेकिन मरीज मानसिक तौर पर कई चीजें झेलता है।
बच्चों में क्यों बढ़ रहा है
आजकल 11-12 साल के बच्चों में इसके बढ़ने का कारण है, उनका गलत खान-पान और लाइफस्टाइल। जैसे कहा जाता है मछली के साथ दूध नहीं लेना है, वैसे ही कई फूड कॉम्बिनेशन होते हैं, जो स्किन और सेहत के लिए बुरे होते हैं। इसके अलावा ज्यादा ऑयली या बाहर का खाना भी कारण हो सकता है। कई बार ये कुछ पोषण की कमी के कारण भी होता है। विटामिन B12, विटामिन D, कॉपर, जिंक की कमी या स्किन पर किसी तरह का इंफेक्शन होने पर भी सफेद दाग होने लगते हैं।
शुरुआत लक्षण कहां दिखते हैं
सफेद दाग होने पर स्किन का कलर दूधिया सफेद होने लगता है। ये दाग धूप में आने वाले हिस्सों पर ज्यादा पड़ते हैं। शुरुआत में सफेद दाग के धब्बे सामान्य और छोटे दिखते हैं। ये अक्सर चेहरे, होंठ, आंखों के आसपास, उंगलियों, कलाई, कोहनी, घुटनों और पैरों पर उभरते हैं। सबसे पहले छोटे दाग से शुरुआत होगी और फिर ये बड़ा होने लगता है। कुछ लोगों को शुरुआत में उस हिस्से में हल्की खुजली या रूखापन भी महसूस हो सकता है।
इलाज है या नहीं
विटिलिगो का इलाज हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। मरीज की स्थिति और दाग कहां और कितने फैल चुके हैं, इलाज इस पर ही निर्भर करता है। वैसे तो आजकल कई थेरेपी, दवा, ट्रीटमेंट्स मौजूद हैं। कुछ खास स्टेरॉइड क्रीम या इम्यून सिस्टम को कंट्रोल करने वाली दवाएं भी आती हैं, जो शुरुआत में ही सफेद दाग को रोक देती हैं। नैनो-UVB लाइट तकनीक से त्वचा के रंग को एक जैसा बनाने की कोशिश की जाती है।
बचाव कैसे करें
सफेद दाग के मरीजों को वैसे तो कोई परेशानी नहीं होती है लेकिन कुछ चीजों से खुद को बचाकर और स्वस्थ रख सकते हैं।
- सफेद दाग होने पर धूप में जाएं, तो फेस कवर कर लें। धूप की किरणों से ये फैलता है और ऐसे में ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाएं।
- विटामिन B12, C और D से भरपूर चीजों खाएं। अपनी डायट को हेल्दी और पौष्टिक बनाएं। आपका खान-पान काफी असर करेगा।
- सफेद दाग को बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान देता है तनाव। अगर आप स्ट्रेस ज्यादा लेते हैं, तो ये और बढ़ेगा। आप पॉजिटिव सोच रखें और योगा कर सकते हैं।
- सफेद दागों को छिपाने के लिए कई लोग भारी मेकअप थोप लेते हैं, ऐसा न करें। मेकअप में ऐसे केमिकल होते हैं, जो स्किन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अगर आपको बच्चे में कोई भी लक्षण दिखते हैं, तो फौरन किसी अच्छे स्किन डॉक्टर के पास जाएं। घरेलू तरीके ना आजमाएं और ना ही शर्मिंदगी महसूस करें। ये कोई बीमारी नहीं है और ना ही छूने से फैलती है।
