ओटीटी पर आज के समय में हर तरह की फिल्में और वेब सीरीज मौजूद हैं। कॉमेडी से लेकर क्राइम, रोमांस, सस्पेंस और हॉरर तक, दर्शकों के पास मनोरंजन के कई विकल्प हैं। लेकिन अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद हैं जो सिर्फ डराती नहीं बल्कि दिमाग को भी उलझाकर रख देती हैं, तो राधिका आप्टे की फिल्म ‘फोबिया’ आपके लिए दिलचस्प हो सकती है।
यह फिल्म एक ऐसी महिला की कहानी दिखाती है, जिसकी जिंदगी एक दर्दनाक घटना के बाद पूरी तरह बदल जाती है। इसके बाद उसका डर धीरे-धीरे इतना बढ़ जाता है कि सामान्य जिंदगी जीना भी उसके लिए मुश्किल हो जाता है। फिल्म की कहानी में सस्पेंस, मनोवैज्ञानिक उलझन और रहस्य लगातार बने रहते हैं।
क्या है ‘फोबिया’ की कहानी?
फिल्म की कहानी महक नाम की एक प्रतिभाशाली आर्टिस्ट के इर्द-गिर्द घूमती है। एक दर्दनाक टैक्सी घटना के बाद महक गंभीर मानसिक आघात से गुजरती है और उसे बाहर निकलने को लेकर गहरा डर महसूस होने लगता है।
महक की स्थिति को समझते हुए उसकी दोस्त उसकी मदद करती है और उसे एक नए अपार्टमेंट में शिफ्ट कर देती है। उम्मीद होती है कि नई जगह पर रहकर महक धीरे-धीरे अपनी जिंदगी को सामान्य कर पाएगी।
लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं होती।
नए अपार्टमेंट में रहने के दौरान महक को वहां की पिछली किराएदार जिया के बारे में पता चलता है। जिया अचानक गायब हो गई थी। इसके बाद महक को कुछ अजीब अनुभव होने लगते हैं। उसे रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती हैं और ऐसे दृश्य दिखाई देते हैं जिनका वास्तविकता से संबंध समझना आसान नहीं होता।
धीरे-धीरे महक को शक होने लगता है कि जिया के अचानक गायब होने के पीछे कोई बड़ी वजह हो सकती है। उसका शक जिया के बॉयफ्रेंड तक भी पहुंचता है।
डर बाहर है या महक के अंदर?
‘फोबिया’ की सबसे खास बात यही है कि फिल्म दर्शकों के सामने लगातार यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर जो कुछ महक देख और महसूस कर रही है, वह वास्तव में हो रहा है या उसके मन का हिस्सा है।
महक को एक तरफ अपने डर से लड़ना है, वहीं दूसरी तरफ अपार्टमेंट से जुड़े रहस्य को समझना है। फिल्म की कहानी इसी मनोवैज्ञानिक उलझन के बीच आगे बढ़ती है।
यही वजह है कि फिल्म में कई ऐसे मोड़ आते हैं जहां दर्शक खुद अनुमान लगाने लगते हैं कि अगला सच क्या होगा।
राधिका आप्टे की एक्टिंग ने खींचा ध्यान
फिल्म में महक का किरदार राधिका आप्टे ने निभाया है। कहानी का बड़ा हिस्सा उनके किरदार के इर्द-गिर्द घूमता है, इसलिए पूरी फिल्म में उनके अभिनय की अहम भूमिका रहती है।
राधिका ने किरदार के डर, बेचैनी और मानसिक संघर्ष को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। फिल्म में उनके साथ अमृता बाग्ची और निवेदिता भट्टाचार्या भी अहम भूमिकाओं में नजर आती हैं।
‘फोबिया’ को लेकर राधिका की परफॉर्मेंस को क्रिटिक्स की ओर से भी सराहना मिली थी। यह फिल्म उनके शुरुआती प्रमुख लीड रोल्स में से एक रही।
कौन हैं फिल्म के डायरेक्टर?
‘फोबिया’ का निर्देशन पवन कृपलानी ने किया है। फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले पर पवन कृपलानी के साथ अरुण सुकुमार और पूजा लढा सुरती ने काम किया है।
फिल्म की कहानी को इस तरह आगे बढ़ाया गया है कि रहस्य धीरे-धीरे खुलता है और दर्शकों की दिलचस्पी बनी रहती है।
राधिका आप्टे ने क्या कहा था?
एक इंटरव्यू में राधिका आप्टे ने अपने काम को लेकर कहा था कि वह फिल्मों के दबाव को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होतीं। उनका ध्यान इस बात पर रहता है कि उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है, उसे वह पूरी ईमानदारी से निभाएं।
उनका मानना है कि अगर दर्शक या आलोचक किसी काम की तारीफ करते हैं तो यह अच्छी बात है। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता, तो वह इसे अपने काम को और बेहतर करने की प्रेरणा के तौर पर देखती हैं।
कहां देख सकते हैं ‘फोबिया’?
अगर आपको मनोवैज्ञानिक थ्रिलर, रहस्य और सस्पेंस वाली कहानियां पसंद हैं, तो ‘फोबिया’ ZEE5 पर उपलब्ध है।
फिल्म की कहानी में डर के साथ-साथ कई ऐसे सवाल हैं जो आखिर तक दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
IMDb पर कितनी है रेटिंग?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ‘फोबिया’ की IMDb रेटिंग 6.8 बताई गई है।
अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें डर के साथ मानसिक रहस्य और लगातार बदलती परिस्थितियां हों, तो यह फिल्म आपके वॉचलिस्ट में शामिल हो सकती है।
