टेंशन से सिरदर्द या माइग्रेन? ऐसे पहचानें दोनों में फर्क, इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

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सिरदर्द आजकल बेहद आम समस्या बन चुकी है। काम का दबाव, तनाव, नींद की कमी, लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर चलाना और शरीर में पानी की कमी जैसी कई वजहों से सिर में दर्द हो सकता है। लेकिन सिर में दर्द होने का मतलब हर बार माइग्रेन होना नहीं है।

कई लोग सामान्य सिरदर्द को भी माइग्रेन समझ लेते हैं। जबकि टेंशन से होने वाले सिरदर्द और माइग्रेन के लक्षणों में काफी अंतर हो सकता है। दर्द किस जगह हो रहा है, कैसा महसूस हो रहा है और उसके साथ कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे रहे हैं, इन बातों पर ध्यान देकर अंतर समझने में मदद मिल सकती है।

किन वजहों से हो सकता है सिरदर्द?

सिरदर्द के पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं। रोजमर्रा की कुछ आदतें भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं।

  • लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन देखना
  • शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन
  • नींद पूरी न होना
  • बहुत ज्यादा तनाव या स्ट्रेस
  • तेज आवाज या तेज रोशनी
  • लंबे समय तक खाना न खाना
  • आंखों पर ज्यादा दबाव पड़ना

इसलिए सिरदर्द होते ही उसे माइग्रेन मान लेना सही नहीं है।

टेंशन वाले सिरदर्द की पहचान कैसे करें?

तनाव और मानसिक दबाव से होने वाला सिरदर्द आमतौर पर टेंशन-टाइप हेडेक हो सकता है। इसमें अक्सर सिर के दोनों तरफ दबाव या कसाव महसूस होता है।

कई लोगों को ऐसा लगता है जैसे सिर के चारों ओर किसी ने टाइट बैंड बांध दिया हो। माथे, कनपटी या सिर के दोनों हिस्सों में जकड़न महसूस हो सकती है।

इस तरह के सिरदर्द में तेज धड़कन के बजाय दबाव या भारीपन ज्यादा महसूस हो सकता है।

माइग्रेन का दर्द कैसा होता है?

माइग्रेन का सिरदर्द सामान्य सिरदर्द से अलग हो सकता है। कई लोगों में दर्द सिर के एक हिस्से में ज्यादा महसूस होता है। यह दर्द धड़कता हुआ या स्पंदन करने वाला हो सकता है और चलने-फिरने जैसी सामान्य गतिविधियों से बढ़ सकता है।

माइग्रेन केवल सिरदर्द तक सीमित नहीं रहता। इसके साथ शरीर में कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

माइग्रेन के दौरान दिख सकते हैं ये लक्षण

  • सिर के एक हिस्से में धड़कता हुआ दर्द
  • मतली या उल्टी
  • तेज रोशनी से परेशानी
  • तेज आवाज बर्दाश्त न होना
  • चक्कर या बेचैनी
  • आंखों के सामने चमकती रोशनी दिखाई देना
  • जिग-जैग लाइन या दूसरे दृश्य बदलाव
  • शारीरिक गतिविधि से सिरदर्द बढ़ना

हालांकि, हर व्यक्ति में माइग्रेन के सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।

क्या सीढ़ियां चढ़कर पता कर सकते हैं माइग्रेन?

सिरदर्द के दौरान शारीरिक गतिविधि से दर्द बढ़ता है या नहीं, यह माइग्रेन की पहचान में उपयोगी संकेत हो सकता है। उदाहरण के लिए तेज चलने या सीढ़ियां चढ़ने जैसी गतिविधि से अगर धड़कता हुआ सिरदर्द और बढ़ जाता है, तो यह माइग्रेन की ओर इशारा कर सकता है।

लेकिन सीढ़ियां चढ़ना माइग्रेन का कोई पक्का घरेलू टेस्ट नहीं है।

इसलिए सिरदर्द के दौरान जानबूझकर खुद को ज्यादा शारीरिक मेहनत में डालना जरूरी नहीं है। केवल इस एक संकेत के आधार पर माइग्रेन का निदान भी नहीं किया जा सकता।

माइग्रेन में अंधेरे कमरे में रहने का मन क्यों करता है?

माइग्रेन के दौरान कई लोगों को तेज रोशनी और शोर काफी परेशान कर सकता है। ऐसे में व्यक्ति शांत और अंधेरे कमरे में आराम करना पसंद करता है।

अगर सिरदर्द के साथ बार-बार उल्टी, रोशनी से परेशानी, आवाज से परेशानी, चक्कर या आंखों के सामने जिग-जैग लाइन और चमकती रोशनी दिखाई देती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसे लक्षण बार-बार होने पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

सिरदर्द आम समस्या है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। अगर सिरदर्द अचानक बहुत तेज शुरू हो जाए या इसके साथ दूसरे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

खास तौर पर अगर सिरदर्द के साथ—

  • बोलने या देखने में अचानक परेशानी हो
  • शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या सुन्नपन हो
  • बेहोशी या भ्रम की स्थिति बने
  • तेज बुखार और गर्दन में अकड़न हो
  • सिर पर चोट लगने के बाद तेज दर्द शुरू हो
  • दर्द लगातार बढ़ता जा रहा हो

तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

सामान्य सिरदर्द और माइग्रेन में सबसे बड़ा फर्क

आसान भाषा में समझें तो टेंशन वाला सिरदर्द अक्सर दबाव, भारीपन या कसाव जैसा महसूस हो सकता है, जबकि माइग्रेन में धड़कता हुआ दर्द और रोशनी-आवाज से संवेदनशीलता जैसे लक्षण ज्यादा देखने को मिल सकते हैं।

हालांकि, केवल दर्द की जगह या एक-दो लक्षणों के आधार पर खुद से माइग्रेन की पुष्टि करना सही नहीं है। बार-बार सिरदर्द होने पर डॉक्टर मरीज के लक्षणों, उनकी अवधि और पैटर्न को देखकर सही कारण पता करने की कोशिश करते हैं।

ध्यान रखें

हर सिरदर्द माइग्रेन नहीं होता और हर माइग्रेन का अनुभव भी एक जैसा नहीं होता। इसलिए बार-बार होने वाले या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करने वाले सिरदर्द को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से उचित सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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