उत्तर प्रदेश में होने वाले UP राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। भाजपा ने राज्य की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी की ओर से जारी सूची में कई चर्चित नाम शामिल हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया है।
भाजपा के केंद्रीय कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है।
पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में संगठनात्मक अनुभव के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों का भी ध्यान रखा है। सूची में दो महिला उम्मीदवारों को भी जगह मिली है।
BJP की 8 उम्मीदवारों वाली लिस्ट
भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों में अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व दिखाई देता है।
- धर्मपाल सिंह
- राधाकांत ओझा
- प्रकाश पाल
- विद्यसागर सोनकर
- गोपी कृष्ण पांडेय
- प्रियंका सिंह रावत
- राम प्रताप सिंह चौहान
- श्रुति गंगवार
इन नामों के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल और बढ़ गई है। खास तौर पर हरदीप सिंह पुरी का नाम सूची में नहीं होने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हरदीप सिंह पुरी को नहीं मिला टिकट
भाजपा की इस सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम नहीं है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य रहे हैं।
हालांकि, किसी नेता को राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के आधार पर उसकी आगे की राजनीतिक भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। भाजपा की ओर से इस संबंध में भविष्य की भूमिका को लेकर अलग से कोई घोषणा सामने आने तक केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।
उम्मीदवारों में सामाजिक समीकरण की झलक
भाजपा की सूची में सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखा गया है। दिए गए विवरण के मुताबिक सूची में दो ब्राह्मण चेहरे और एक राजपूत चेहरा शामिल है। इसके अलावा दो महिला उम्मीदवारों को भी मौका दिया गया है।
राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन केवल व्यक्तिगत राजनीतिक पहचान तक सीमित नहीं रहता। पार्टियां संगठन में सक्रियता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों को भी ध्यान में रखती हैं।
16 अक्टूबर को होगा मतदान
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में पूरा होने वाला है।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होगी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सदस्य हैं। मौजूदा संख्या बल को देखते हुए भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति मजबूत है। एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 विधायकों के मतों की जरूरत पड़ती है।
सपा ने भी उतारे उम्मीदवार
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं। सपा की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया गया है।
सपा के मौजूदा संख्या बल के आधार पर दो सीटों पर उसका दावा बनता है। हालांकि तीसरी सीट को लेकर पार्टी की रणनीति पर भी नजर बनी हुई है।
अगर सभी 10 सीटों के लिए मतदान की स्थिति बनती है तो विधायकों के वोट और चुनावी समीकरण काफी महत्वपूर्ण हो जाएंगे। इसी वजह से भाजपा और सपा दोनों की नजर अपने विधायकों को एकजुट रखने पर रहेगी।
आठवीं सीट को लेकर क्यों बढ़ी दिलचस्पी?
भाजपा ने आठ उम्मीदवार मैदान में उतारकर अपने संख्या बल के अनुसार चुनावी रणनीति स्पष्ट कर दी है। अब देखना होगा कि बाकी सीटों को लेकर सपा और अन्य राजनीतिक दल किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और अतिरिक्त उम्मीदवार उतारे जाने की स्थिति में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
विधानसभा चुनाव से पहले अहम मुकाबला
उत्तर प्रदेश का यह राज्यसभा चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियां और तेज होंगी। भाजपा और सपा दोनों के लिए यह चुनाव अपने विधायकों के बीच संगठनात्मक एकजुटता दिखाने का भी मौका होगा।
फिलहाल भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम सामने रख दिए हैं। अब निगाहें नामांकन की अंतिम तारीख और सपा की अगली रणनीति पर हैं।
16 अक्टूबर को मतदान के बाद ही यह साफ होगा कि उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर कौन-कौन से उम्मीदवार संसद के उच्च सदन में पहुंचते हैं।
