नई दिल्ली,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि संघ लोक सेवा आयोग और राज्य चयन आयोगों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार चयन के मानदंड और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने गुरुवार को यहां भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक ज्ञान नहीं, बल्कि जनसेवा की प्रेरणा, जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता और भविष्य की चुनौतियों को समझने की क्षमता को भी परखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के प्रशासन का आधार जनहितैषी, सक्रिय और सुशासन होना चाहिए। ‘नागरिक देवो भव’ को प्रशासन का मूल बताते हुए उन्होंने कहा कि नागरिक सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में ऐसे अधिकारियों के चयन पर जोर दिया जो समस्याओं का पहले से अनुमान लगाएं, नए समाधान खोजें और कानूनों के असर को नागरिकों के नजरिये से समझें। प्रधानमंत्री ने परीक्षाओं को कराने में लगने वाले समय को कम करने पर जोर देते हुए कहा कि यह एक बहुत अहम विषय है। प्रधानमंत्री ने कहा , ” परीक्षा को हमें केवल एक इवेंट की तरह नहीं देखना है। ये इवेंट से कहीं अधिक युवाओं के भविष्य से, उनके जीवन से जुड़ा हुआ विषय है।
परीक्षाओं में कुछ महीनों की देरी युवाओं के लिए बड़ा संकट बन सकती है। कोचिंग की फीस, रेंट, ट्रांसपोर्ट का खर्च, ये बहुत बड़ा बोझ उस परिवार पर होता है। इसलिए, हमारी परीक्षा प्रणाली में समय की निश्चितता के सिद्धांत को अपनाना बहुत आवश्यक है। इसलिए, देश के सभी चयन आयोगों को, ये सुनिश्चित करना होगा, कि कसौटी में कमी किए बिना, हमारी एग्जामिनेशन साइकिल छोटी कैसे हो?” श्री मोदी ने कहा कि 2047 तक देश में तेजी से शहरीकरण होगा और गांवों तथा शहरों के बीच का अंतर कम होगा। ऐसे में युवाओं की अपेक्षाएं बढ़ेंगी और एआई आधारित तत्काल सेवाओं के दौर में प्रशासन को भी उसी गति से बदलना होगा।
भविष्य के सिविल सेवकों को सूचना युद्ध, डीपफेक, एल्गोरिदम आधारित पक्षपात और जलवायु न्याय जैसी नई चुनौतियों से भी निपटना होगा। इसके लिए चयन प्रक्रिया में जटिल समस्या समाधान और दूरदृष्टि को प्राथमिकता देनी होगी। संघ लोक सेवा आयोग की 100 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि आयोग की विश्वसनीयता बदलती पीढ़ियों, सरकारों, तकनीक और पाठ्यक्रम के बावजूद बनी रही है। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद देश के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद किया। इस मौके पर स्मारक डाक टिकट, विशेष सिक्का और 100 महत्वपूर्ण मामलों का संकलन जारी किया गया।
प्रधानमंत्री ने संघ लोक सेवा आयोग और राज्य आयोगों के बीच बेहतर तालमेल, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अध्ययन और तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत बने ‘आई-गॉट प्लेटफॉर्म’ के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि 1952 में सिविल सेवा में महिला अभ्यर्थियों की हिस्सेदारी तीन प्रतिशत थी, जो अब 30 प्रतिशत से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 के बाद आयोग की चार में से तीन अध्यक्ष महिलाएं रही हैं।वर्ष 1976 में आयोग की 50वीं वर्षगांठ के समय की तुलना में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 45 गुना बढ़ी है।
उन्होंने कहा ,”आज हमारे सामने प्रतिभा का एक बहुत बड़ा पूल है। ये देश के लिए बहुत गर्व की बात है। अब हमारी जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी है। क्योंकि जब इतना बड़ा टैलेंट पूल पूरी दुनिया जिस पर इर्ष्या करती है, तो आप सिर्फ एक उम्मीदवार का चयन नहीं कर रहे हैं। आप ऐसे व्यक्ति का चयन कर रहे हैं, जो आगे चलकर सरकार का प्रतिनिधि बनेगा। जमीनी स्तर पर लोग उसी को सरकार मानेंगे। इसलिए आप सभी पर सही व्यक्ति के चयन का बहुत बड़ा दायित्व है।” उन्होंने आयोग की दूसरी सदी में स्वतंत्रता, निष्पक्षता, योग्यता, गोपनीयता और निष्पक्ष प्रक्रिया जैसे मूल मूल्यों को बनाए रखने पर जोर दिया।
