महासमुंद। महासमुंद जिले में आगामी शिक्षा सत्र 2026-27 को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूल एवं कॉलेज वाहनों का विशेष भौतिक निरीक्षण 7 जून 2026 को किया जाएगा। यह जांच शिविर सुबह 9 बजे से जिले के अलग-अलग स्थानों पर आयोजित होगा। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें सभी शैक्षणिक वाहनों की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की जाएगी। जिला परिवहन अधिकारी प्रतीक शुक्ला ने बताया कि जिले में संचालित सभी स्कूल बसों और अन्य शैक्षणिक वाहनों का भौतिक परीक्षण अलग-अलग केंद्रों पर किया जाएगा ताकि हर क्षेत्र के वाहन आसानी से जांच में शामिल हो सकें।
सरायपाली क्षेत्र के वाहनों की जांच प्रतिभा पब्लिक स्कूल सरायपाली में की जाएगी। पिथौरा क्षेत्र के वाहनों के लिए सेंट फ्रांसिस स्कूल पिथौरा को जांच केंद्र बनाया गया है। वहीं महासमुंद और बागबाहरा क्षेत्र के वाहनों का निरीक्षण पुलिस लाइन परसदा महासमुंद में होगा। बसना और सांकरा क्षेत्र के स्कूल वाहनों की जांच प्रतिभा पब्लिक स्कूल बसना में की जाएगी।
इस विशेष अभियान के दौरान स्कूल बसों में सुरक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी। इसमें वाहनों की फिटनेस, ब्रेक सिस्टम, टायर की स्थिति, सीटों की व्यवस्था, फर्स्ट एड बॉक्स की उपलब्धता, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच शामिल होगी। इसके साथ ही वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न रहे।
जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि जांच कार्य के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है और कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी तय समय से पहले अपने-अपने जांच केंद्रों पर उपस्थित रहेंगे और वाहनों का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के बाद सभी टीमों को जांच प्रतिवेदन तैयार कर स्कूल बस शाखा प्रभारी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और यह सुनिश्चित करना है कि स्कूल वाहन पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप संचालित हों।
प्रशासन का कहना है कि समय-समय पर ऐसे निरीक्षण आवश्यक हैं ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी कमी या लापरवाही को समय रहते दूर किया जा सके। इससे स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा मजबूत होगी और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोका जा सकेगा। यह अभियान न केवल वाहनों की स्थिति सुधारने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के लिए भी एक भरोसा पैदा करता है कि बच्चों की यात्रा सुरक्षित हाथों में है।
