सारंगढ़ में खाद्य विभाग पर सवाल: महिला विक्रेता की शिकायत, फूड इंस्पेक्टर पर ₹15 हजार लेने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप

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सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ ब्लॉक में खाद्य विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। शासकीय उचित मूल्य दुकान की एक महिला विक्रेता ने खाद्य निरीक्षक विद्यानंद पटेल के खिलाफ थाने और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायतकर्ता ने मामले में निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

महिला विक्रेता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी को लेकर उस पर दबाव बनाया गया। इसी दौरान उससे कथित तौर पर ₹15 हजार की राशि ली गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि खाद्य निरीक्षक की ओर से बार-बार फोन करके व्यक्तिगत रूप से मिलने का दबाव बनाया जाता था, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हुई।

कलेक्टर और खाद्य मंत्री तक पहुंची शिकायत

जानकारी के मुताबिक, महिला विक्रेता ने मामले की शिकायत स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखी। उसने कलेक्टर, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी शिकायत भेजे जाने की बात सामने आई है।

शिकायत के साथ महिला ने कथित मोबाइल चैट और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों की वास्तविकता और उनमें दर्ज तथ्यों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।

शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप

  • 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी को लेकर दबाव बनाने का आरोप।
  • ₹15 हजार की राशि लिए जाने का दावा।
  • बार-बार फोन कर व्यक्तिगत मुलाकात के लिए दबाव बनाने का आरोप।
  • मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की शिकायत।
  • मोबाइल चैट और ऑनलाइन भुगतान के दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात।
  • कलेक्टर और खाद्य मंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई पर नजर

महिला की शिकायत सामने आने के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि संबंधित खाद्य निरीक्षक के खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कदम उठाया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत दर्ज होने के बाद भी अब तक किसी विभागीय कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

वहीं, शिकायत में जिस 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी का उल्लेख किया गया है, उसकी स्थिति को लेकर भी विभाग की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

ऐसे में पूरे मामले में दो अलग-अलग पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहला, क्या वास्तव में उचित मूल्य दुकान में इतनी मात्रा में खाद्यान्न की कमी थी और इसका रिकॉर्ड क्या कहता है। दूसरा, महिला द्वारा लगाए गए राशि लेने और मानसिक प्रताड़ना के आरोपों में कितनी सच्चाई है।

जांच से स्पष्ट हो सकती है पूरी तस्वीर

मामले में निष्पक्ष जांच के दौरान दुकान के स्टॉक रजिस्टर, खाद्यान्न वितरण से संबंधित रिकॉर्ड, संबंधित अवधि के दस्तावेज और ऑनलाइन भुगतान की जानकारी की जांच की जा सकती है। इसके अलावा शिकायत में शामिल कथित मोबाइल चैट की भी जांच जरूरी होगी।

किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इसी तरह शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रमाणिकता भी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

अब इन सवालों के जवाब का इंतजार

  • 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है?
  • ₹15 हजार के कथित भुगतान की पुष्टि होती है या नहीं?
  • शिकायत के साथ दिए गए चैट और भुगतान संबंधी दस्तावेज कितने प्रमाणिक हैं?
  • खाद्य विभाग इस शिकायत पर क्या जांच कराता है?
  • संबंधित खाद्य निरीक्षक का इस पूरे मामले पर क्या पक्ष है?

फिलहाल महिला विक्रेता ने मामले में न्याय की मांग की है। शिकायत के बाद अब प्रशासन और खाद्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर सबकी नजर है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और 372 कुंतल खाद्यान्न की कथित कमी के मामले में वास्तविक स्थिति क्या है।

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