सरायपाली। महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक में किसानों के नाम पर कथित फर्जी KCC लोन का बड़ा मामला सामने आया है। सेवा सहकारी समिति केना में वर्ष 2023-24 के दौरान किसानों के खेतों का रकबा कागजों में बढ़ाकर करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपये का KCC लोन स्वीकृत और निकाले जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में कुछ ऐसे किसानों के नाम भी सामने आने की बात कही गई है, जिनकी कई साल पहले मौत हो चुकी थी। इसके अलावा दूसरे समिति क्षेत्र की जमीन वाले कुछ किसानों के नाम पर भी केना समिति से लोन दिखाए जाने की जानकारी सामने आई है।
किसानों को अपने नाम पर लोन की जानकारी तक नहीं
मामले में जांच के दौरान यह बात सामने आने की जानकारी है कि कई किसानों को इस बात का पता ही नहीं था कि उनके नाम पर लाखों रुपये का KCC लोन स्वीकृत हो चुका है। कथित तौर पर लोन की राशि निकाली भी जा चुकी थी।
कुछ किसानों की जमीन दूसरे सेवा सहकारी समिति क्षेत्र में होने के बावजूद उनके नाम पर केना समिति से ऋण दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। इससे ऋण स्वीकृति, जमीन के रिकॉर्ड और समिति स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।
जांच में सामने आईं अहम बातें
- वर्ष 2023-24 में करीब ₹1.77 करोड़ के KCC लोन का मामला।
- किसानों के खेतों का रकबा रिकॉर्ड में बढ़ाने की बात।
- बिना सहमति किसानों के नाम पर ऋण प्रक्रिया किए जाने का आरोप।
- कुछ मृत किसानों के नाम पर भी लोन दर्ज होने की जानकारी।
- दूसरे समिति क्षेत्र के किसानों के नाम पर केना समिति से लोन दिखाने की बात।
- किसानों को अपने नाम पर स्वीकृत ऋण की जानकारी नहीं होने का दावा।
कलेक्टर ने गठित की तीन सदस्यीय जांच टीम
मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने तीन अधिकारियों की टीम गठित कर जांच कराई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले में पुलिस कार्रवाई शुरू हुई।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के CEO के आदेश पर नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा ने सरायपाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
इन 5 लोगों पर दर्ज हुई FIR
पुलिस ने मामले में इन लोगों को आरोपी बनाया है—
- श्याम सुंदर पटेल — तत्कालीन सुपरवाइजर, तोरेसिंहा ब्रांच
- राजकुमार प्रधान — वर्तमान सुपरवाइजर
- युवराज नायक — मैनेजर
- हीरा सिंह ध्रुव — कनिष्ठ लिपिक
- खिलेश्वर साहू — प्रभारी लेखापाल
इनके खिलाफ पुलिस ने धारा 120B, 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत FIR दर्ज की है।
मृत किसानों के नाम सामने आने से बढ़ी गंभीरता
इस मामले में मृत किसानों के नाम पर कथित तौर पर KCC लोन दर्ज होने का पहलू सबसे ज्यादा चर्चा में है। यदि जांच में यह बात प्रमाणित होती है कि मृत किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत कर राशि निकाली गई, तो यह रिकॉर्ड सत्यापन और ऋण प्रक्रिया की गंभीर जांच का विषय बनता है।
वहीं, दूसरे समिति क्षेत्र की जमीन वाले किसानों के नाम पर केना समिति से लोन दर्ज होने की बात भी जांच के दायरे में है।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ऋण के लिए कौन से दस्तावेज लगाए गए, खेतों का रकबा किस आधार पर बढ़ाया गया और स्वीकृत राशि का इस्तेमाल या भुगतान किस तरह हुआ।
पुलिस जांच के बाद खुलेगा पूरा राज
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। जांच में किसानों के KCC आवेदन, जमीन के दस्तावेज, समिति के रिकॉर्ड, रकबा विवरण, बैंकिंग लेनदेन और ऋण से जुड़े अन्य दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
साथ ही जिन किसानों के नाम पर लोन दर्ज किया गया, उनके बयान भी मामले में अहम होंगे। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि उन्हें वास्तव में ऋण की जानकारी थी या नहीं।
फिलहाल FIR में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपियों की भूमिका और कथित फर्जीवाड़े की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. मामला क्या है?
सरायपाली की केना सेवा सहकारी समिति में वर्ष 2023-24 के दौरान कथित तौर पर रकबा रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर बिना सहमति करीब ₹1.77 करोड़ का KCC लोन निकाले जाने का मामला है।
Q2. मृत किसानों के नाम कैसे सामने आए?
जांच में कुछ ऐसे किसानों के नाम पर भी लोन दर्ज होने की बात सामने आई है, जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी।
Q3. मामले की जांच किसने कराई?
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम ने जांच की।
Q4. FIR किन लोगों पर हुई है?
युवराज नायक, श्याम सुंदर पटेल, राजकुमार प्रधान, हीरा सिंह ध्रुव और खिलेश्वर साहू के खिलाफ FIR दर्ज हुई है।
Q5. कौन-कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
पुलिस ने धारा 120B, 409, 420, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज किया है।
अब पुलिस की जांच इस पूरे मामले में कथित ₹1.77 करोड़ के KCC लोन की राशि, दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका पर केंद्रित है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे फर्जीवाड़े की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
