बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने NEET-UG की OMR शीट में कथित गड़बड़ी को लेकर दायर छात्रा की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने मूल OMR शीट की जांच के बाद कहा कि परीक्षा में अभ्यर्थी द्वारा दर्ज किए गए उत्तर ही मूल्यांकन का वास्तविक आधार हैं। अदालत को छात्रा के परिणाम में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट के समक्ष NTA की ओर से छात्रा की मूल OMR शीट पेश की गई, जिसकी जांच के बाद याचिका पर फैसला सुनाया गया।
180 में से 71 प्रश्नों के मिले उत्तर
कोर्ट ने मूल OMR शीट की जांच में पाया कि छात्रा ने कुल 180 प्रश्नों में से 71 प्रश्नों के उत्तर दर्ज किए थे। इनमें 46 उत्तर सही और 25 गलत पाए गए।
अदालत के अनुसार, OMR शीट पर दर्ज इन्हीं उत्तरों के आधार पर छात्रा को 159 अंक मिले थे। इसलिए कोर्ट ने परिणाम में किसी प्रकार की विसंगति नहीं पाई।
OMR शीट में क्या मिला?
- कुल प्रश्न: 180
- दर्ज किए गए उत्तर: 71
- सही उत्तर: 46
- गलत उत्तर: 25
- छात्रा को मिले अंक: 159
- हाईकोर्ट ने याचिका: खारिज कर दी
छात्रा ने उठाए थे OMR शीट पर सवाल
मामला सारंगढ़-बिलाईगढ़ की 21 वर्षीय पीहू सिंह से जुड़ा है। छात्रा ने 21 जून 2026 को NEET-UG परीक्षा दी थी। परीक्षा परिणाम में 159 अंक आने के बाद उसने OMR शीट को लेकर आपत्ति जताई।
छात्रा का दावा था कि उसने परीक्षा में अधिक प्रश्न हल किए थे और OMR शीट में भी उत्तर दर्ज किए थे। इसी आधार पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर परिणाम में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA को छात्रा की मूल OMR शीट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।
NTA ने कोर्ट में पेश की मूल OMR
10 अगस्त को NTA के डिप्टी डायरेक्टर अनिल धीमान ने छात्रा की मूल OMR शीट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की।
अदालत ने दस्तावेज की जांच की और पाया कि OMR शीट पर दर्ज उत्तरों के अनुसार छात्रा को मिले 159 अंक सही हैं। इसके बाद कोर्ट ने छात्रा के उस दावे को स्वीकार नहीं किया कि उसने अधिक प्रश्न हल किए थे।
टेस्ट बुकलेट का जवाब OMR का विकल्प नहीं
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि मूल OMR शीट परीक्षा में अभ्यर्थी द्वारा दर्ज किए गए उत्तरों का वास्तविक रिकॉर्ड है।
अदालत ने कहा कि केवल यह दावा करना कि छात्रा ने अधिक प्रश्न हल किए थे, मूल OMR शीट में दर्ज उत्तरों को बदलने का आधार नहीं बन सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि टेस्ट बुकलेट में दिए गए उत्तर मूल OMR शीट का स्थान नहीं ले सकते। परीक्षा के मूल्यांकन के लिए OMR में दर्ज उत्तरों को ही आधार माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
मूल OMR शीट की जांच के बाद अदालत ने पाया कि छात्रा के 159 अंक उसी में दर्ज उत्तरों के अनुरूप हैं। इसलिए परिणाम में सुधार या दोबारा मूल्यांकन की मांग का कोई आधार नहीं मिला।
अदालत के इस निष्कर्ष के बाद छात्रा की याचिका खारिज कर दी गई।
छात्रों के लिए क्या है संदेश?
NEET-UG जैसी परीक्षाओं में OMR शीट बेहद महत्वपूर्ण होती है। परीक्षा के दौरान प्रश्न हल करने के साथ-साथ उत्तरों को OMR शीट में सही तरीके से दर्ज करना जरूरी है।
इस मामले में हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि परीक्षा के बाद केवल यह दावा कि अभ्यर्थी ने अधिक प्रश्न हल किए थे, अपने आप में OMR रिकॉर्ड बदलने का आधार नहीं बन सकता।
फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्रा के 159 अंकों वाले NEET-UG परिणाम को बरकरार रखा गया है।
