छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना रहा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, धनपुर में मिले 9वीं से 12वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष

प्रादेशिक मुख्य समाचार

रायपुर, प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन स्थल धनपुर में 9वीं से 12वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष मिलने से क्षेत्र के गौरवशाली अतीत की नई झलक सामने आई है। जिले के प्रभारी मंत्री एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल की विशेष पहल पर कराए गए इस पुरातात्विक सर्वेक्षण ने धनपुर की ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित करने के साथ ही पर्यटन विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के अवसर सृजित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना रहा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, धनपुर में मिले 9वीं से 12वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में पर्यटन विकास की इन्हीं संभावनाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट के अरपा सभाकक्ष में जिला स्तरीय पर्यटन समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास, पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना रहा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, धनपुर में मिले 9वीं से 12वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने बताया कि पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल की विशेष पहल पर लगभग दो माह पूर्व धनपुर क्षेत्र में पुरातात्विक सर्वेक्षण कराया गया था। सर्वेक्षण के दौरान 9वीं से 12वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो क्षेत्र की प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि जिले में ‘प्रकृति एवं संस्कृति के संग प्रगति’ की अवधारणा को साकार करने के लिए पर्यटन विकास को स्थानीय आजीविका से जोड़ा जा रहा है। पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण समुदायों की सहभागिता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि पर्यटन विकास का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना रहा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, धनपुर में मिले 9वीं से 12वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष

बैठक में विधायक श्री प्रणव कुमार मरपची ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम है। पवित्र तीर्थस्थल अमरकंटक से लगे होने के कारण जिले में देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों की मौलिक पहचान और प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित रखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, पर्यटन समितियों और स्थानीय नागरिकों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

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फ्लोटिंग रेस्टोरेंट, बोटिंग और होम स्टे से पर्यटन को मिल रहा नया स्वरूप

जिले में पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित न रखकर पर्यटकों को बेहतर अनुभव और स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की गई है। जिला पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि मलेनिया जलाशय में फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और बोटिंग की सुविधा विकसित की गई है। वहीं ठाढ़पथरा पर्यटन स्थल में मड हाउस तथा लमना पर्यटन क्षेत्र में होम स्टे एवं कम्युनिटी स्टे की सुविधाएं पर्यटकों को स्थानीय परिवेश, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना रहा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, धनपुर में मिले 9वीं से 12वीं शताब्दी के पुरातात्विक अवशेष

पर्यटन स्थलों पर कैंटीन, सीढ़ियां, सुरक्षा रेलिंग, हाईमास्ट लाइट सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं का विकास किया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। विशेष बात यह है कि पर्यटन स्थलों के संचालन, रखरखाव और व्यावसायिक गतिविधियों में स्थानीय पर्यटन समितियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इससे पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।

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राष्ट्रीय स्तर पर पहचान की ओर बढ़ रहा जीपीएम का पर्यटन

जिले में पर्यटन विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को विभिन्न मंचों पर पहचान भी मिल रही है। कलेक्टर ने बताया कि 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को सर्वश्रेष्ठ टूरिज्म अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड और छत्तीसगढ़ ट्रैवल ट्रेड एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘सेंट्रल इंडिया कनेक्ट मार्केट प्लेस’ में जिले के पर्यटन स्थलों को विशेष स्टॉल के माध्यम से प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इससे जिले की प्राकृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक पर्यटन संपदा को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिली है।

कैमरे में सिमटी जीपीएम की खूबसूरती, प्रतिभागियों को मिला सम्मान

जिले के मनोहारी प्राकृतिक दृश्यों, पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित ‘जीपीएम के रंग कैमरे के संग’ रील मेकिंग एवं फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को भी बैठक के दौरान सम्मानित किया गया।

रील मेकिंग प्रतियोगिता में श्री अपूर्व मित्रा ने प्रथम, श्री विलास देशमुख ने द्वितीय और श्री ओमप्रकाश मार्काे ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं फोटोग्राफी प्रतियोगिता में सुश्री शारदा कंवर, श्री निलेश साहू, श्री ओमप्रकाश मार्काे एवं श्री मोहम्मद फैजल फारूकी को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस पहल के माध्यम से जिले की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों को रचनात्मक अभिव्यक्ति के जरिए व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया गया है।

बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, कोटा विधायक प्रतिनिधि श्री पंकज तिवारी, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार खिलारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे, पर्यटन प्रभारी डिप्टी कलेक्टर श्री देवेन्द्र सिरमोर सहित रिसॉर्ट प्रबंधक, होटल संचालक, टैक्सी यूनियन संघ के अध्यक्ष एवं जिला स्तरीय पर्यटन समिति के सदस्य उपस्थित थे।

प्राकृतिक सौंदर्य, प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरों और स्थानीय संस्कृति को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने की ये पहल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को पर्यटन के एक आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। धनपुर में मिले पुरातात्विक अवशेषों से जहां जिले की ऐतिहासिक पहचान को नया आधार मिला है, वहीं पर्यटन आधारित गतिविधियों का विस्तार स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की संभावनाएं बढ़ा रहा है।

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