बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा करने वाली खबर सामने आई है। जांगला स्थित बालक आश्रम में पढ़ने वाले कक्षा पांचवीं के आदिवासी छात्र लश्कर वट्टी की मलेरिया से मौत हो गई। छात्र की मौत के बाद आश्रम में रह रहे अन्य बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा, बीमारी की समय पर पहचान और इलाज की व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
परिजनों और स्थानीय स्तर पर इलाज में देरी को लेकर भी सवाल किए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन की ओर से विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में इलाज में कथित देरी और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बालक आश्रम में पढ़ता था छात्र
लश्कर वट्टी जांगला स्थित बालक आश्रम में रहकर कक्षा पांचवीं की पढ़ाई कर रहा था। मलेरिया से उसकी मौत के बाद आश्रम में रहने वाले दूसरे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में मलेरिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। ऐसे क्षेत्रों में बीमारी की शुरुआती पहचान, समय पर जांच और तत्काल उपचार बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आश्रम में रहने वाले बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किस स्तर पर किया जाता है और किसी बच्चे में बुखार या मलेरिया जैसे लक्षण सामने आने पर इलाज की व्यवस्था कितनी तेजी से की जाती है।
घटना के बाद उठ रहे प्रमुख सवाल
- छात्र में मलेरिया की पहचान कब हुई?
- बीमारी के बाद उसे उपचार कब उपलब्ध कराया गया?
- इलाज में कथित देरी हुई या नहीं?
- आश्रम में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच होती है या नहीं?
- अन्य बच्चों की मलेरिया जांच के लिए क्या कदम उठाए गए?
- आश्रम परिसर में मच्छरों से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं?
- मामले में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
विधायक विक्रम शाह मंडावी ने सरकार पर साधा निशाना
छात्र की मौत को लेकर बीजापुर विधायक विक्रम शाह मंडावी ने राज्य सरकार और संबंधित स्वास्थ्य विभाग पर निशाना साधा है। उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
विधायक ने कहा कि आदिवासी अंचल के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सरकार के दावे जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाते। उन्होंने मलेरिया से छात्र की मौत को गंभीर मामला बताते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ के दावे पर सवाल
विधायक मंडावी ने बस्तर को मलेरिया मुक्त किए जाने के दावे को भी निशाने पर लिया। उन्होंने इसे झूठा बताते हुए कहा कि यदि क्षेत्र में मलेरिया से बच्चों की मौत हो रही है, तो स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, किसी क्षेत्र को लेकर व्यापक निष्कर्ष के लिए आधिकारिक स्वास्थ्य आंकड़ों और प्रशासनिक रिपोर्ट को भी देखना जरूरी होगा।
दूसरे बच्चों की स्वास्थ्य जांच की मांग
एक छात्र की मलेरिया से मौत के बाद आश्रम में रह रहे अन्य बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी हो गई है। यदि किसी अन्य बच्चे में बुखार, कंपकंपी या मलेरिया से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं तो उसकी तत्काल जांच और उपचार आवश्यक है।
इसके साथ ही आश्रम परिसर में मच्छरों से बचाव, साफ-सफाई और जलभराव की स्थिति की भी जांच की जानी चाहिए। मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में रोकथाम के लिए नियमित निगरानी और समय पर उपचार महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्रशासन के सामने कई चुनौतियां
घटना के बाद अब प्रशासन के सामने केवल छात्र की मौत की जांच ही नहीं, बल्कि आश्रम में रह रहे दूसरे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती भी है।
जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी होगा कि छात्र की बीमारी कब सामने आई, उसकी जांच और उपचार कब शुरू हुआ तथा उसे आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा सुविधा मिली या नहीं।
यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
बस्तर में स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर बहस
बीजापुर जैसे दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। आश्रमों और छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और बीमारी की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना विशेष रूप से जरूरी है।
लश्कर वट्टी की मौत ने एक बार फिर इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर है।
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि आश्रम में रहने वाले सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराई जाए, मलेरिया की रोकथाम के उपाय मजबूत किए जाएं और छात्र की मौत से जुड़े प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच हो, ताकि यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जा सके।
