मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई संकट के बीच दुनिया के कई देशों में फ्यूल राशनिंग लागू की जा रही है। अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत समेत कई देशों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। अगर भारत में कोटा सिस्टम लागू होता है, तो मनचाहा पेट्रोल, डीजल या गैस नहीं खरीद पाएंगे।
ईरान युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में तेल आपूर्ति मार्गों में आए व्यवधान के कारण मई 2026 में पूरी दुनिया एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। भारत समेत कई देशों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अब आम आदमी को उसकी जरूरत के हिसाब से पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा? क्या सरकार ‘फ्यूल राशनिंग’ (Fuel Rationing) जैसा कड़ा कदम उठाने जा रही है? अगर भारत में कोटा सिस्टम लागू होता है, तो लोग तय सीमा से ज्यादा पेट्रोल, डीजल या गैस नहीं खरीद पाएंगे। श्रीलंका, पाकिस्तान, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में QR Code, ऑड-ईवन नियम और साप्ताहिक फ्यूल लिमिट लागू हो चुकी है। अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत समेत कई देशों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं।
फ्यूल राशनिंग क्या है?
सरल शब्दों में कहें तो ‘फ्यूल राशनिंग’ सरकार द्वारा लगाया गया वह प्रतिबंध है, जिसके तहत आप अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकते। सरकार प्रत्येक नागरिक या वाहन के लिए एक ‘कोटा’ तय कर देती है। एक निश्चित समय सीमा (जैसे एक हफ्ता) में आप केवल उसी तय सीमा तक ही ईंधन खरीद पाएंगे। इसके लिए सरकार QR-कोड, कूपन या गाड़ियों के नंबर के हिसाब से ‘ऑड-ईवन’ (Odd-Even) जैसे तरीके अपनाती है।
दुनिया के किन देशों में लागू हो चुका है कोटा?
2026 के इस वैश्विक संकट में कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ईंधन की बिक्री पर सीमा लगा दी है।
श्रीलंका: यहां ‘नेशनल फ्यूल पास’ (QR कोड) सिस्टम लागू है। कारों के लिए हफ्ते में केवल 15-25 लीटर और मोटरसाइकिलों के लिए सिर्फ 5 लीटर पेट्रोल तय किया गया है।
पाकिस्तान: यहां स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बार में वाहन को केवल 5 लीटर तेल मिल रहा है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम का नियम बनाया गया है।
फ्रांस और जर्मनी: यूरोप के संपन्न देश भी अब राशनिंग की कगार पर हैं। फ्रांस के कुछ इलाकों में QR कोड के जरिए हफ्ते में 15-20 लीटर की सीमा तय की गई है, जबकि जर्मनी में कुछ जगहों पर एक बार में केवल 10 लीटर पेट्रोल मिल रहा है।
बांग्लादेश और म्यांमार: बांग्लादेश ने ऊर्जा बचाने के लिए स्कूलों को ऑनलाइन कर दिया है और बिजली की रोटेशनल कटौती (Load Shedding) शुरू कर दी है। म्यांमार में ‘ऑड-ईवन’ सिस्टम से पेट्रोल दिया जा रहा है।
स्लोवेनिया और केन्या: स्लोवेनिया ने प्राइवेट ड्राइवरों के लिए हफ्ते में 50 लीटर का कोटा तय किया है, वहीं केन्या ने घरेलू सप्लाई बचाने के लिए तेल के निर्यात पर ही पाबंदी लगा दी है।
भारत में पेट्रोल पंप पर कोटा सिस्टम?
ईंधन की किल्लत का असर भारत पर भी पड़ा है। लाइव हिंदुस्तान की बिजनेस टीम ने हाल ही में कुछ शहरों में एक सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि पेट्रोल पंप संचालकों ने खुद से ही पेट्रोल-डीजल खरीदने की एक सीमा तय कर रखी है। पूछने पर पता लगा कि कुछ दिनों पहले बाइक सवार ग्राहकों को 200 रुपये और कार चालकों को 2,000 रुपये से ज्यादा का तेल नहीं दिया जा रहा था। अभी भी पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने पहुंच रहे ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि बिना किसी आदेश के पहले ही पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी कार्यशैली बदलकर कोटा सिस्टम शुरू कर दिया है।
ईंधन बचाने के अन्य अपाय
वर्क फ्रॉम होम और 4-डेज वर्किंग:- फिलीपींस, लाओस और पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने या हफ्ते में कम दिन ऑफिस आने का आदेश दिया है।
कार-लेस-डेज:- न्यूजीलैंड जैसे देश ‘कार-लेस-डेज’ (हफ्ते में एक दिन गाड़ी न चलाना) को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट:- वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों में लोगों को कारपूलिंग और बस-मेट्रो का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि लगभग 30% पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही देशवासियों से ईंधन और यात्रा में कटौती करने की भावुक अपील की है। हालांकि, भारत में अभी तक औपचारिक रूप से राशनिंग लागू नहीं हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में ‘कोटा सिस्टम’ या ‘QR कोड आधारित खरीद’ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फ्यूल राशनिंग का विचार डरावना लग सकता है, लेकिन यह संकट के समय तेल के समान वितरण को सुनिश्चित करने का एक तरीका है। फिलहाल, बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और ईंधन की बर्बादी रोकें।
