प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन दिवसीय सेशेल्स दौरे के दौरान एक अनोखा और आकर्षक दृश्य देखने को मिला, जब वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग जीवित स्थलीय जीव माने जाने वाले 194 वर्षीय अल्डाब्रा जायंट कछुए ‘जोनाथन’ से मिले। यह मुलाकात सेशेल्स नेशनल बॉटनिकल गार्डन में हुई, जहां प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कछुए को अपने हाथों से पत्तियां खिलाईं और अन्य विशाल कछुओं के साथ भी समय बिताया। उनके साथ सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी भी मौजूद रहे।
दुनिया के सबसे लंबे जीवन वाले जीव से मुलाकात
‘जोनाथन’ नाम का यह विशाल कछुआ लगभग 194 वर्ष का माना जाता है और इसे दुनिया का सबसे बुजुर्ग ज्ञात स्थलीय जीव माना जाता है। यह अल्डाब्रा जायंट टॉर्टोइज प्रजाति का हिस्सा है, जो अपनी लंबी आयु और विशाल आकार के लिए जानी जाती है।
इस दुर्लभ कछुए की खास बातें:
- अनुमानित उम्र लगभग 194 वर्ष
- अल्डाब्रा द्वीप समूह से संबंधित प्रजाति
- दुनिया के सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले स्थलीय जीवों में शामिल
- सेशेल्स की प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक
भारत-सेशेल्स के पर्यावरणीय रिश्तों का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि अल्डाब्रा जायंट टॉर्टोइज केवल सेशेल्स की पहचान नहीं हैं, बल्कि यह दोनों देशों के बीच पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण के साझा संकल्प को भी दर्शाते हैं।
भारत और सेशेल्स के बीच वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है।
भारत को मिले थे उपहार में कछुए
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2014 में सेशेल्स ने भारत को दो विशाल कछुए उपहार स्वरूप दिए थे, जिन्हें कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में रखा गया है। इसके बाद हैदराबाद चिड़ियाघर में भी ऐसे कछुए देखे गए।
यह दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।
‘कोको डी मेर’ का पौधा लगाकर दिया पर्यावरण संदेश
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति ने मिलकर ‘कोको डी मेर’ का पौधा भी लगाया। यह दुर्लभ पेड़ सेशेल्स की राष्ट्रीय पहचान माना जाता है और इसके बीज दुनिया के सबसे बड़े बीजों में शामिल हैं।
इस पहल के प्रमुख संदेश:
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना
- जैव विविधता की रक्षा का संकल्प
- वैश्विक जलवायु सहयोग को मजबूत करना
भारतीय समुदाय से भी मजबूत संबंध
करीब 1.20 लाख की आबादी वाले सेशेल्स में एक बड़ा हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है। माना जाता है कि हर आठ में से एक नागरिक भारतीय मूल से जुड़ा है। यहां के राष्ट्रपति के पूर्वज भी भारत के बिहार राज्य से संबंधित रहे हैं।
रणनीतिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मिली मजबूती
यह दौरा केवल एक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय रिश्तों को और मजबूत करने वाला अवसर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें वैश्विक मंच पर पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
