World Gold Council Report: भारत में सोने को हमेशा से गहनों के रूप में खरीदने की परंपरा रही है, लेकिन अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। हाल ही में WGC (World Gold Council) की रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार ऐसा हुआ है कि देश में सोने की खरीद निवेश के लिए गहनों से ज्यादा हुई है, यानी अब लोग सोना पहनने से ज्यादा कमाई और सुरक्षित निवेश के रूप में खरीद रहे हैं। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
पहली बार ज्वेलरी से ज्यादा खरीदारी
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च तिमाही में सोने की निवेश डिमांड (Investment Demand) में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। यह 52% बढ़कर 82 टन तक पहुंच गया, जबकि ज्वैलरी की मांग 19.5% घटकर 66 टन रह गई। कुल मिलाकर देश में सोने की मांग 10.2% बढ़कर 151 टन रही, लेकिन इसमें सबसे बड़ा योगदान निवेश का रहा। इस दौरान कुल खपत में निवेश की हिस्सेदारी 54.3% तक पहुंच गई, जो पहली बार ज्वेलरी से ज्यादा है।
गोल्ड बार, सिक्के और ETF में निवेश
इस बदलाव के पीछे एक बड़ा कारण शेयर बाजार का कमजोर प्रदर्शन है। निफ्टी 50 (Nifty 50) ने 2025 की शुरुआत से अब तक सिर्फ करीब 2.4% का ही रिटर्न दिया है, जबकि सोने की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। ऐसे में निवेशकों को सोना ज्यादा सुरक्षित और फायदे का सौदा लग रहा है। यही वजह है कि लोग अब गोल्ड बार, सिक्के और गोल्ड ETF (Exchange-Traded Funds) में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं।
ETF सेगमेंट में 186% की सालाना बढ़त
खास बात यह है कि गोल्ड ETF में भी रिकॉर्ड निवेश देखने को मिला है। इस सेगमेंट में 186% की सालाना बढ़त दर्ज हुई और कुल निवेश 20 टन तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि अब सिर्फ पारंपरिक निवेशक ही नहीं, बल्कि नए जमाने के निवेशक भी डिजिटल और फाइनेंशियल तरीके से सोने में निवेश कर रहे हैं।
किस कारण बढ़ी डिमांड?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है। WGC के इंडिया प्रमुख सचिन जैन के अनुसार, बाजार में अनिश्चितता और अन्य निवेश विकल्पों के कमजोर प्रदर्शन के कारण सोने की मांग बनी रहेगी।
भारत में सोने को लेकर लोगों की सोच तेजी से बदल रही है। जहां पहले इसे सिर्फ शादी-ब्याह और परंपरा से जोड़ा जाता था, वहीं अब यह एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प बनता जा रहा है। अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले समय में सोना निवेशकों की पहली पसंद बन सकता है।
