‘गुजराती मेरी मातृभाषा, लेकिन हिंदी ने देशभर में काम का मौका दिया’, हिंदी दिवस पर अमित शाह का बड़ा संदेश

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हिंदी दिवस 2026 के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की भाषाई विविधता और हिंदी की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने हिंदी को भारत की अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच जोड़ने वाली कड़ी बताया। शाह ने कहा कि हिंदी की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने और लोगों से जुड़ने के अवसर आसान हुए हैं।

नवी मुंबई में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी का संबंध देश की सभी भाषाओं से है और यह भारत की भाषाई विविधता के बीच संवाद का माध्यम बन सकती है।

‘गुजराती मेरी मातृभाषा, लेकिन…’

अपने संबोधन में अमित शाह ने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि वह गुजरात से आते हैं और उनकी मातृभाषा गुजराती है। इसके बावजूद हिंदी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने में काफी मदद की।

उन्होंने कहा कि गुजरात में गुजराती बोली जाती है, लेकिन हिंदी की वजह से उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करने में कभी परेशानी नहीं हुई। उनके मुताबिक राजभाषा हिंदी ने उन्हें पूरे देश में काम करने का शानदार अवसर दिया।

अमित शाह के संदेश की बड़ी बातें

  • हिंदी को भाषाई विविधता के बीच जोड़ने वाली कड़ी बताया।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया।
  • शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
  • अपने अनुभव के जरिए बताया कि हिंदी ने राष्ट्रीय स्तर पर काम करने में मदद की।
  • हिंदी को देश की दूसरी भाषाओं से जुड़ी भाषा के रूप में पेश किया।

क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर क्या संदेश?

अमित शाह के संबोधन में हिंदी के साथ-साथ भारत की भाषाई विविधता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। भारत में अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की अपनी समृद्ध भाषाएं और बोलियां हैं। ऐसे में हिंदी की भूमिका को केवल एक भाषा के रूप में नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के बीच संवाद के माध्यम के तौर पर देखने पर जोर दिया गया।

शाह के मुताबिक राजभाषा हिंदी देशभर में काम करने के अवसरों को आसान बनाने में मदद कर सकती है। इसका सीधा संबंध उन लोगों से भी है, जिन्हें नौकरी, कारोबार, शिक्षा या प्रशासनिक काम के लिए अपने राज्य से बाहर जाना पड़ता है।

शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा देने पर जोर

हिंदी दिवस के कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया। शिक्षा किसी भी भाषा को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।

सरकार की ओर से हिंदी के इस्तेमाल और उसके विस्तार को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण और विकास भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

हिंदी और भारतीय भाषाओं के बीच संतुलन की बात

अमित शाह के बयान का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि हिंदी को बढ़ावा देने का मतलब दूसरी भारतीय भाषाओं की भूमिका को कम करना नहीं है। उनका जोर हिंदी को देश के अलग-अलग भाषाई समुदायों के बीच संपर्क और संवाद की भाषा के तौर पर देखने पर रहा।

उनका अपना उदाहरण भी इसी बात को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि गुजराती उनकी मातृभाषा है, लेकिन हिंदी ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने में मदद की।

क्यों महत्वपूर्ण है हिंदी दिवस?

हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हिंदी के महत्व, उसके प्रयोग और राजभाषा के रूप में उसकी भूमिका पर चर्चा का अवसर देता है।

भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि संस्कृति और पहचान से भी जुड़ी होती है। ऐसे में हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली, कन्नड़, उड़िया, पंजाबी समेत सभी भारतीय भाषाओं का अपना विशेष महत्व है।

हिंदी दिवस 2026 के मौके पर अमित शाह का संदेश इसी व्यापक भाषाई परिदृश्य में हिंदी की भूमिका को लेकर रहा। उन्होंने अपने अनुभव के जरिए यह बताने की कोशिश की कि एक साझा संपर्क भाषा देश के अलग-अलग हिस्सों में संवाद और काम के अवसरों को आसान बना सकती है।

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