ग्लोबल टेंशन ने जियो IPO की योजना पर डाला असर

मुख्य समाचार व्यापार जगत

Jio Platforms IPO: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग का असर भारत के आईपीओ मार्केट पर भी पड़ा है। इस माहौल में कई ऐसी कंपनियां हैं जो अपने आईपीओ प्लान को कुछ समय के लिए टाल रही हैं। मुकेश अंबानी की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स की भी कुछ ऐसी ही योजना है। दरअसल, अरबपति मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली इस कंपनी ने अपनी आईपीओ की तैयारियां धीमी कर दी हैं। कंपनी ग्लोबल टेंशन और बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए आईपीओ स्ट्रक्चर की समीक्षा कर रही है।

क्या है टेंशन?

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जियो प्लेटफॉर्म्स अभी भी IPO के लिए जरूरी कागजात जमा करने की योजना बना रही है और किसी भी समय इस पर आगे बढ़ सकती है। हालांकि इसके लिए कोई पक्की तारीख तय नहीं है। सूत्रों के मुताबिक ग्लोबल टेंशन ने शेयर बिक्री की इस योजना को कई तरह से प्रभावित किया है। इसने भारतीय शेयरों में आई गिरावट को और गहरा कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक आईपीओ के मूल्यांकन से जुड़ी चिंताएं हैं जो देश के इक्विटी बाजारों में आई भारी गिरावट के बाद और भी बढ़ गई हैं। इस कारण मौजूदा निवेशकों को उनकी उम्मीद के मुताबिक रिटर्न देना और साथ ही शेयर के प्रति बाजार में उत्साह पैदा करना,इन दोनों के बीच संतुलन बिठाना और भी मुश्किल हो गया है। इस गिरावट के कारण एक और जोखिम यह पैदा हो गया है कि Jio का मूल्यांकन उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी भारती एयरटेल से भी कम हो सकता है।

मुकेश अंबानी ने इस साल की पहली छमाही में ही शेयर बाजार में लिस्टिंग की बात कही थी लेकिन अब यह मुश्किल लग रहा है। सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने अब अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए पूरी तरह से नए शेयर जारी करने का फैसला किया है। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि आईपीओ से 4 बिलियन डॉलर तक की रकम जुटाई जा सकती है। ऐसा होने पर यह देश की अब तक की सबसे बड़ी लिस्टिंग बन जाएगी।

बता दें कि जियो प्लेटफॉर्म्स लगभग दो दशकों में रिलायंस की किसी बड़ी इकाई का पहला आईपीओ है। वहीं, Hyundai मोटर इंडिया ने 3.3 बिलियन डॉलर की रकम आईपीओ से जुटाई थी, जो अब तक का सबसे ज्यादा है। अब रिलायंस की कंपनी जियो इस रिकॉर्ड को तोड़ सकती है। क्रेडिटसाइट्स के मुताबिक जियो की लिस्टिंग से इकट्ठा होने वाली पूंजी का उपयोग कर्ज घटाने और पूंजीगत व्यय में किया जाएगा, जिससे कंपनी की प्रतिस्पर्धी क्षमता भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के मुकाबले मजबूत हो सकती है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *