Diabetes कंट्रोल करने का आसान फॉर्मूला! खाने के 30 मिनट बाद 10 मिनट की Slow Walk से मिल सकते हैं बड़े फायदे

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आजकल सबसे तेजी से दुनियाभर में डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी फैल रही है। गौरतलब है कि आधुनिक लाइफस्टाइल और खानपान की गलत आदतों से डायबिटीज की बीमारी उत्पन्न होती है। इस बीमारी के चपेट में आने के मुख्य कारण है सोने-जागने का अनिश्चित समय, फिजिकल एक्‍टिविटी की कमी, खानपान की गलत आदतें, अल्कोहल और स्‍मोकिंग की लत आदि।

वैसे इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए कई उपाय और तरीके और उपचार मिल जाएंगे। लेकिन आप शायद ही जानते होंगे कि डायबिटीज को कम करने में स्लो वॉक भी मदद कर सकती है।

क्‍या कहती है रिसर्च?

दरअसल, अमेरिका के स्पोर्ट्स मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, रोजाना लंच या डिनर के आधे घंटे बाद मात्र 10-15 मिनट की हल्की वॉक के बाद भी लोगों का ब्लड शुगर लेवल की कमी पाई गई है। शोध के अनुसार, यदि खाने के आंधे घंटे के बाद दस मिनट के लिए थोड़ा टहल लिया जाए, तो यह प्रोसेस काफी हेल्दी माना जाता है।

यदि आप इस समस्या से बचाव करना चाहती है, तो लंच व डिनर के बाद जरुर टहलें। इसको आप अपने रुटीन में जरुर शामिल करें। ऐसा करने से आपका शुगर लेवल नियंत्रित रहेगा और फिटनेस की आदत फायदेमंद होती है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि खाने के बाद शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छे ढंग से होता है। इससे मसल्स खून में मौजूद ग्लूकोज का सही तरीके से इस्तेमाल कर लेते हैं। नियमित वॉक से तनाव दूर होता है और अच्छी नींद आती है और शुगर लेवल भी कंट्रोल होता है।

स्‍लो वॉक के फायदे

असल में वॉक करना सबसे आसान एक्‍टिविटीज में एक मानी जाती है और यह डायबिटीज से परेशान लोग जरुर करें। इसमें चोट लगने का खतरा कम होता है और वॉक शुरु करने के लिए आपको किसी स्पेशल इक्विपमेंट की जरुरत भी नहीं है। लेकिन आरामजदायक कपड़े और जूते पहनकर आपको मोटिवेटेड रहने में मदद मिल सकती है। अगर आप रेगुलर वॉक करते हैं, तो आपको सेहत से जुड़े कई फायदे देखने को मिल जाएंगे-

– ब्लड शुगर लेवल कम होता है।

– इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है।

– हार्ट की सेहत में सुधार होता है।

– मेटाबॉलिज्म बढ़ता है।

– वजन को बनाए रखना आसान रहता है।

– बैलेंस में सुधार होता है।

– ब्लड प्रेशर कम होता है।

– मूड पहले से बेहतर होता है।

– अधिक फोकस्ड और अलर्ट महसूस होता है।

– याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पहले से बेहतर होती है।

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