आजकल फोन चलाने से ज्यादा रील्स देखने की लत लोगों को लगी हुई है। सुबह उठते ही फोन हाथ में होता है और सबसे पहले रील्स स्क्रॉल होने लगती हैं और फिर रात में सोने तक ये सिलसिला चलता रहता है। आलम ये है कि सिर्फ बड़े नहीं बल्कि 16-17 साल के बच्चे भी रील्स देखने लगे हैं और अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। हर चीज की सीमा होनी चाहिए, अगर किसी भी काम को कर रहे हैं और उसे आप तय समय के हिसाब से करते हैं, तो इससे आपके दिमाग पर बुरा असर नहीं पड़ेगा साथ ही समय भी बचेगा। अगर आप रील्स देखते-देखते 2-3 घंटे यूं ही बर्बाद कर देते हैं, तो आपके अंदर प्रोडक्टिव कामों को करने के लिए एनर्जी ही नहीं बचेगी। अगर आप भी रील्स देखने की लत से परेशान हो चुके हैं, तो साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर दीनिका आनंद के बताए कुछ तरीके अपनाकर इन्हें छुड़ाने की कोशिश करें।
रील्स क्यों है इतनी अट्रैक्टिव
अगर आप से कहा जाए कि करीब 30 मिनट की कोई वीडियो देख लीजिए, तो आप कहेंगे इतना बड़ा वीडियो कैसे देखेंगे। या उसे आगे बढ़ाकर देखते रहेंगे लेकिन रील्स 1 मिनट के अंदर ही आपको एंटरटेनमेंट और फास्ट कंटेंट दे रही हैं, तो उसे देखने में ज्यादा मजा आता है और टाइमपास भी होता है। अब सोशल मीडिया सिर्फ स्क्रॉल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम सभी जगह रील्स और शॉर्ट्स की भरमार है। आप कोई भी ऐप खोलेंगे वहां आपको रील्स का ऑप्शन मिल जाएगा, तो आपका कीमती समय खा लेगा।
शरीर-दिमाग पर क्या होता है असर
रील्स लगातार कई घंटों तक बैठकर देखने से आपके दिमाग और शरीर दोनों पर बुरा असर पड़ता है। हमें ऐसा लगता है कि हम सिर्फ रील्स ही देख रहे हैं, इसमें क्या हो जाएगा लेकिन ये धीरे-धीरे आपकी कुछ जरूरी चीजों को खत्म कर रही है, यही कारण है कि डॉक्टर्स फोन एडिक्शन को कम और सोशल मीडिया डिटॉक्स करने की सलाह देते रहते हैं। चलिए दीनिका इस बारे में क्या कहती हैं, जानते हैं।
- फोकस की कमी- लगातार छोटे और तेज कंटेंट देखने से लंबे समय तक किसी भी एक काम पर फोकस बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। मतलब आपका दिमाग फिर फोकस करने की क्षमता कम कर लेता है।
- पेशेंस की कमी- रील्स हमें हर सेकंड में बदलती हुई मिलती है, हम रुकना नहीं चाहते। ऐसा रियल लाइफ में होने लगता है कि हम हर चीज को जल्दी पाने की इच्छा रखने लगते हैं और पेशेंस खो बैठते हैं।
- दिमाग पर असर- रील्स लगातार घंटों तक देखने से दिमाग पर इसका बुरा असर होता है। इससे प्रॉब्लम सॉल्विंग और रीजनिंग की क्षमता पर असर पड़ता है। साथ ही लगातार दूसरों की लाइफ या कंटेंट देखने से कुछ लोगों में तुलना करने की आदत बन जाती है।
- शरीर के लिए बुरा- अगर आप लेटकर-बैठकर या जैसे भी घंटों तक रील्स देखते रहते हैं, तो इससे आपके शरीर के पोस्चर पर भी फर्क दिखेगा। आपको थकान, शरीर में दर्द की समस्या बनी रहेगी।
- नींद की कमी- रील्स रात में देर तक देखने से नींद की कमी होती है और आंखों पर भी असर पड़ता है। साथ ही स्ट्रेस लेवल बढ़ता है और मानसिक थकान महसूस हो सकती है।
लत छुड़ाने के तरीके क्या हैं
1- ऐप को छिपाकर रखें
मोबाइल के होम पेज पर सोशल मीडिया ऐप्स को न रखें बल्कि थोड़ा हाइड करके रखें। ऐसा करने से आप फोन उठाते ही सोशल मीडिया पर नहीं पहुंचेगे बल्कि अन्य काम या चीजें देखेंगे।
2- टाइम लिमिट
हर ऐप पर टाइम लिमिट का ऑप्शन आता है, जिसे आप खासतौर पर सोशल मीडिया ऐप्स पर सेट करें। ऐसा करने से आप एक तय सीमा तक ही उस ऐप को देख सकते हैं, जैसे 1 घंटा या आधा घंटा लिमिट तय करें।
3- लॉग आउट वाला ऑप्शन
अगर कोई चीज आसानी से मिलने लगती है, तो हम हर बार वही जाते हैं। ये हमारा दिमाग समझ लेता है लेकिन अगर आप सोशल मीडिया ऐप्स पर ताला लगा देंगे तो खोलने में कुछ समय लगेगा। मतलब सोशल मीडिया ऐप्स जैसे इंस्टा-फेसबुक को लॉगआउट करें। ऐसे में लॉगइन करने पर आपको सोचना पड़ेगा और आप वहां से हट सकते हैं।
4- दोस्तों से मिलें-पढ़ें
आप रील्स देखने के बजाए दोस्तों से मिलने चले जाएं या फिर अपनी पसंद का कोई काम करना शुरू करें। जैसे पेंटिंग, रीडिंग, राइटिंग, कुकिंग जो भी आपको पसंद हो। तब आपका दिमाग रील्स से डिस्ट्रैक्ट हो जाएगा। रील्स की लत को छोड़ना मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं।
