कब है विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी, जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

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भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी का व्रत हर महीने रखा जाता है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस बार चतुर्थी तिथि 29 सितंबर को शुरू होकर 30 सितंबर की दोपहर तक रहेगी। ऐसे में व्रत किस दिन रखा जाएगा और गणपति पूजा का सही समय क्या रहेगा, इसे लेकर लोगों के मन में सवाल है। आइए जानते हैं इस साल विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी की सही तारीख और पूजा से जुड़ी खास बातें।

29 सितंबर को रखा जाएगा व्रत

पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 सितंबर को शाम 5 बजकर 9 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 30 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। तिथि के आरंभ के आधार पर इस बार विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 सितंबर को रखा जाएगा। इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि चतुर्थी तिथि की शुरुआत मंगलवार के दिन हो रही है। मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।

मंगलवार की संकष्टी है खास

मंगलवार के दिन आने वाली संकष्टी चतुर्थी को अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता में अंगारकी संकष्टी को विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के संकट दूर होने और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है।

ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा

व्रत रखने वाले लोग सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और भगवान गणेश की पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करके जल, दूर्वा, फूल, रोली, अक्षत और फल अर्पित करें। भगवान को मोदक या अपनी श्रद्धा के अनुसार मिठाई का भोग लगाएं। शाम के समय गणेश जी की पूजा और आरती के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा है।

दूर्वा चढ़ाना ना भूलें

भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार, गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं। पूजा के दौरान गणेश मंत्र का जाप करने के साथ गणेश चालीसा या गणेश स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा में श्रद्धा और नियम का विशेष ध्यान रखें।

संकट दूर करने की कामना

संकष्टी चतुर्थी का संबंध भगवान गणेश की आराधना से है, जिन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर करने की प्रार्थना की जाती है। भक्त भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। मंगलवार को पड़ने के कारण इस बार की संकष्टी चतुर्थी को लेकर भक्तों में खास उत्साह है।

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत 29 सितंबर को अंगारकी योग के पावन संयोग में रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने, दूर्वा चढ़ाने और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने से समस्त विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में मंगलकारी परिणाम प्राप्त होते हैं।

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