Amit Shah Punjab Visit: नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की मौत पर गरमाई सियासत, अमित शाह ने परिवारों को दिया इंसाफ का भरोसा

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नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे के बाद राज्य में नशे के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। शाह ने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में नशे से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले तीन लोगों के परिजनों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवारों के प्रति संवेदना जताई और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए राज्य में नशे के कारोबार और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए।

अमित शाह ने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाना और देश को नशामुक्त बनाने की दिशा में काम करना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके दौरे के दौरान तीनों मामलों की जांच और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।

विक्रमजीत सिंह के परिवार से मिले अमित शाह, CBI जांच का आश्वासन

अमित शाह अपने पंजाब दौरे की शुरुआत गुरदासपुर जिले के बटाला से की। इसके बाद वह मारी पनवां गांव पहुंचे, जहां उन्होंने 40 वर्षीय विक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। विक्रमजीत की 15 अक्टूबर को हत्या कर दी गई थी।

मुलाकात के दौरान शाह ने विक्रमजीत की मां सुरजीत कौर के प्रति सम्मान जताया और परिवार को सांत्वना दी। उन्होंने मामले में न्याय दिलाने का भरोसा देते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का आश्वासन भी दिया।

इस घटना को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विक्रमजीत ने इलाके में नशे के कारोबार का विरोध किया था, जिसके कारण उनकी हत्या हुई। वहीं, पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुई हाथापाई के दौरान यह घटना हुई थी।

इसलिए मामले में हत्या के वास्तविक कारणों का निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण है।

संगरूर में गुलजार के परिजनों से की मुलाकात

गुरदासपुर के बाद अमित शाह संगरूर पहुंचे और गुलजार के परिवार से मुलाकात की। रिपोर्ट के अनुसार, गुलजार ने कथित तौर पर आम आदमी पार्टी के मंत्री हरपाल चीमा से सवाल पूछने के बाद परेशान किए जाने के आरोपों के बीच आत्महत्या कर ली थी।

शाह ने परिवार को दो से तीन महीने के भीतर न्याय मिलने का भरोसा दिया। उन्होंने गुलजार के भोग कार्यक्रम में शामिल होने की बात भी कही।

इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जानी चाहिए।

मानसा में परविंदर झोटा के परिवार से मिले गृह मंत्री

अमित शाह ने मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर झोटा के परिवार से भी मुलाकात की। झोटा की हत्या को लेकर पंजाब में राजनीतिक विवाद जारी है।

गृह मंत्री ने परिवार के सदस्यों से बातचीत की और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इन तीनों मामलों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगे जाने की बात भी सामने आई है।

इन घटनाओं ने नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा, पुलिस की कार्रवाई और आपराधिक मामलों की निष्पक्ष जांच जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

नशे के मुद्दे पर बीजेपी और AAP आमने-सामने

अमित शाह ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में नशे का कारोबार गंभीर चुनौती बना हुआ है। बीजेपी का कहना है कि नशे की तस्करी रोकने और युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बीजेपी के आरोपों पर पलटवार किया है। AAP नेताओं ने बीजेपी शासित राज्यों में नशा तस्करी, गैंगस्टर गतिविधियों और फिरौती की घटनाओं को लेकर सवाल उठाए हैं।

इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच पंजाब में नशे की समस्या एक अहम सार्वजनिक मुद्दा बनी हुई है। इसका समाधान केवल बयानबाजी से नहीं, बल्कि तस्करी पर नियंत्रण, प्रभावी पुलिस कार्रवाई, नशामुक्ति उपचार और युवाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रमों से भी जुड़ा है।

31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त पंजाब बनाने का लक्ष्य

अमित शाह इससे पहले 30 सितंबर को जालंधर में बीजेपी की नशामुक्त पंजाब यात्रा के समापन समारोह में शामिल हुए थे। उस कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि पंजाब में बीजेपी की सरकार बनने पर 31 दिसंबर 2029 तक राज्य को नशामुक्त करने का लक्ष्य रखा जाएगा।

यह बीजेपी की ओर से घोषित राजनीतिक लक्ष्य है। इसकी सफलता प्रभावी नीतियों, कानून के पालन, नशा मुक्ति सेवाओं और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगी।

ताजा दौरे में पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति में फिर प्रमुखता से उभरा है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने की बात को देखते हुए यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

पंजाब में नशे की समस्या से निपटने के लिए क्या जरूरी है?

नशे की समस्या का असर केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है। इसका संबंध युवाओं के स्वास्थ्य, परिवारों की सामाजिक स्थिति और रोजगार जैसे व्यापक विषयों से भी है।

इस चुनौती से निपटने के लिए कुछ प्रमुख कदम जरूरी हैं:

  • नशा तस्करी के नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना।
  • नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • संदिग्ध मौतों और आपराधिक घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराना।
  • नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाना और नशे से बचाव के कार्यक्रमों को मजबूत करना।

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