बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का कमजोर होना एक आम समस्या है। हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी मिनरल है। यही वजह है कि बचपन से ही रोज दूध पीने की सलाह दी जाती है। लेकिन अगर आपको दूध पसंद नहीं है या लैक्टोज इनटॉलरेंस की वजह से दूध पचाने में परेशानी होती है, तो चिंता करने की जरूरत नहीं है।
भारतीय रसोई में कई ऐसी देसी और पारंपरिक चीजें मौजूद हैं, जिन्हें डाइट में शामिल करके कैल्शियम समेत कई जरूरी पोषक तत्व हासिल किए जा सकते हैं। इनमें से कुछ खाद्य पदार्थों में दूध की तुलना में प्रति 100 ग्राम अधिक कैल्शियम पाया जाता है।
आइए जानते हैं ऐसी 6 चीजों के बारे में, जिन्हें आप अपनी रोजाना की डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।
1. तिल
तिल कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। बिना छिले तिल में कैल्शियम की मात्रा काफी अधिक होती है। इसके अलावा इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और हेल्दी फैट भी पाए जाते हैं।
तिल को खाने में शामिल करना भी काफी आसान है।
- तिल की चटनी बनाकर खाएं
- सलाद पर डाल सकते हैं
- तिल के लड्डू बनाए जा सकते हैं
- सब्जियों में तिल का इस्तेमाल कर सकते हैं
हालांकि, तिल कैलोरी से भरपूर होता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना बेहतर है।
2. रागी
रागी यानी फिंगर मिलेट को कैल्शियम से भरपूर अनाज माना जाता है। इसमें फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे बच्चों से लेकर बड़ों तक की संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है।
रागी से कई तरह के व्यंजन बनाए जा सकते हैं।
- रागी की रोटी
- रागी का दलिया
- रागी चीला
- रागी डोसा
- रागी से बने स्नैक्स
दूध के अलावा कैल्शियम के दूसरे स्रोत तलाशने वालों के लिए रागी एक अच्छा पारंपरिक विकल्प हो सकता है।
3. राजगीरा
राजगीरा भी पारंपरिक भारतीय अनाज है, जिसमें कैल्शियम के साथ प्रोटीन और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसे अक्सर व्रत के दौरान इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सामान्य दिनों में भी इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है।
राजगीरे के आटे से रोटी, लड्डू और कई अन्य व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं।
यह ग्लूटेन-फ्री विकल्प चाहने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी खाद्य पदार्थ हो सकता है।
4. सोया और सोयाबीन
जो लोग दूध या डेयरी उत्पादों का सेवन कम करते हैं, उनके लिए सोया आधारित खाद्य पदार्थ उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। सोयाबीन और टोफू को अलग-अलग व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।
टोफू से सब्जी, सलाद या स्टर-फ्राई तैयार किया जा सकता है।
ध्यान रखें कि अलग-अलग सोया और टोफू उत्पादों में कैल्शियम की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए पैकेज्ड प्रोडक्ट खरीदते समय उसके न्यूट्रिशन लेबल को जरूर देखें।
5. चना
चना भारतीय घरों में आसानी से मिलने वाला पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसमें कैल्शियम के अलावा प्रोटीन, फाइबर, आयरन और दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
चना खाने के कई आसान तरीके हैं।
- रातभर भिगोकर
- उबालकर
- चाट बनाकर
- सलाद में मिलाकर
- सब्जी के रूप में
इसे नियमित और संतुलित डाइट में शामिल करने से भोजन की पोषण गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
6. हरी पत्तेदार सब्जियां
पालक, सरसों का साग, बथुआ और चौलाई जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी कैल्शियम समेत कई जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत हैं।
इनमें विटामिन K, फोलेट, आयरन, मैग्नीशियम और फाइबर जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इन सब्जियों को नियमित भोजन में शामिल करने के कई तरीके हैं।
- पालक की सब्जी
- सरसों का साग
- बथुआ की सब्जी
- चौलाई की सब्जी
- हरी सब्जियों का मिश्रण
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
सिर्फ कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थ खाना ही पर्याप्त नहीं है। हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए संतुलित आहार और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। शरीर में विटामिन D की पर्याप्त मात्रा कैल्शियम के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
डाइट में इन चीजों को शामिल करने के साथ ध्यान रखें:
- भोजन में अलग-अलग पोषक तत्वों वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें।
- कैल्शियम के लिए सिर्फ दूध पर निर्भर न रहें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- बहुत ज्यादा मात्रा में किसी एक खाद्य पदार्थ का सेवन न करें।
- कैल्शियम की कमी या हड्डियों से जुड़ी समस्या होने पर डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह लें।
इस तरह भारतीय रसोई में मौजूद कई पारंपरिक खाद्य पदार्थ आपकी डाइट को ज्यादा पौष्टिक बना सकते हैं। दूध पसंद न करने वाले लोगों के पास भी कैल्शियम पाने के कई विकल्प मौजूद हैं।
