गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को है। इसी दिन लोग घरों में बप्पा की मूर्ति को स्थापित करेंगे। हालांकि मार्केट जाकर कई बार स्थिति ऐसी आती है कि समझ ही नहीं आता है कि कौन सी मूर्ति ली जाए? ये सवाल तो जरूर मन में आता है कि गणेश जी की मूर्ति में सूंड किस ओर होनी चाहिए? सूंड किस ओर होनी चाहिए इस बात का खास ध्यान तो जरूर रखना चाहिए। इसके अलावा भी मूर्ति लेते हुए कुछ और भी विशेष चीजों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। इन नियमों को जानें और साथ में ये भी जानें कि आखिर दाईं और बाईं सूंड को लेकर क्या धार्मिक महत्व है?
बाईं सूंड वाले गणेश जी होते हैं शुभ
हिंदू धर्म मान्यता के हिसाब से जब घर में स्थापना करनी हो तो बाईं तरफ सूंड वाले गणेश जी शुभ माने जाते हैं। जिस मूर्ति में सूंड बाईं ओर होती है उन्हें वाममुखी गणेश जी कहा जाता है। ऐसी मूर्ति को घर की सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। गृहस्थ जीवन में पूजा के लिए इस मूर्ति को सही माना जाता है। ऐसे में अगर आप पहली बार गणेश चतुर्थी पर मूर्ति ले आ रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि उनकी सूंड बाईं ओर हो।
दाईं सूंड वाले गणेश जी से जुड़ा नियम
जिस मूर्ति में गणेश जी की सूंड दाईं ओर होती है उसे उनका सिद्धिविनायक स्वरूप माना जाता है। ऐसी मूर्ति मंदिर में ही देखने को मिलती है क्योंकि इनकी पूजा के लिए विशेष नियम होते हैं और इसी वजह से इन्हें घर में स्थापित करने से बचा जाता है।ेश
गणपति की मूर्ति लेते समय ये 3 बातें ध्यान में रखें-
1. मूर्ति ऐसी खरीदें जिसमें गणेश जी बैठी हुई मुद्रा में हो। इसे बहुत ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में स्टेबिलिटी आती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में जब भी गणेश जी की मूर्ति लेने जाएं तो मुद्रा का विशेष रूप से ध्यान रखें।
2. साथ में इस बात का भी ध्यान रखें कि गणेश जी की मूर्ति ऐसी हो कि उनके हाथ में मोदक या फिर लड्डू हो। साथ ही उनके वाहन मूषक भी साथ में हो। माना जाता है कि ऐसी मूर्ति घर में खुशहाली लेकर आती है। गणेश जी के साथ इन दो चीजों का होना शुभ माना जाता है।
3. मार्केट में कई तरह की मूर्तियां मिलती है। आप कोशिश करें कि इको फ्रेंडली मूर्ति ही लें। प्योर मिट्टी की बनी मूर्ति आसानी से विसर्जित हो जाती है और मिट्टी इस दौरान पूरी तरह घुल जाती है। ऐसे में इसका असर पर्यावरण पर भी नहीं पड़ता है। तो ऐसे में मूर्ति जब भी लेने जाएं तो मुद्रा के साथ-साथ सूंड, मोदक-लड्डू वगैहर का ध्यान रखें। पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से घर मूर्ति को ले आएं।
