छत्तीसगढ़ का 6 करोड़ का रेत रॉयल्टी घोटाला: जांच पूरी हुई, फिर गायब हो गई पूरी फाइल!

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रायपुर। आरंग जनपद पंचायत में छह करोड़ रुपये की रेत रायल्टी घोटाले की जांच पूरी होने के बाद सितंबर 2022 में फाइल गायब हो गई थी। इस मामले में जिला पंचायत सीईओ ने सिविल लाइन थाने में एफआइआर दर्ज कराई। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी पुलिस जांच आगे नहीं बढ़ सकी।

जांच के दौरान कई थाना प्रभारी बदल गए, फिर भी न तो फाइल बरामद हुई और न ही यह पता चल सका कि उसे किसने गायब किया। इसी कारण घोटाले से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अब भी जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर हैं।

फाइल चोरी, सबूतों से छेड़छाड़ और संभावित मिलीभगत की जांच ठंडी पड़ी हुई है। ऐसे में निलंबन की कार्रवाई के बाद भी पूरे घोटाले की सच्चाई सामने आने और जिम्मेदार लोगों तक कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच में सामने आया कि वर्ष 2013-14 और 2014-15 के दौरान आरंग के कई रेत घाटों से करोड़ों रुपये की रायल्टी वसूली गई। लेकिन शासन को भेजे गए अभिलेखों में कम राशि दर्शाई गई।

सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों और खनिज विभाग के रिकॉर्ड में भी बड़ा अंतर मिला। आरोप है कि रायल्टी बुक से वास्तविक वसूली और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज राशि अलग-अलग थी। इसी वित्तीय विसंगति के आधार पर विभागीय जांच शुरू हुई, जिसने अब निलंबन की कार्रवाई का रास्ता तैयार किया।

चिखली, चपरीद, कुरुद, कुम्हारी, गुदगुदा, गुल्लू, पारागांव, हरदीडीह, रायताकाट रेत घाटों में गड़बड़ी हुई थी। यहां वर्ष 2013-14 और 2014-15 में दो करोड़ 15 लाख 65 हजार रुपये का राजस्व मिला था। जबकि आरंग जनपद पंचायत ने शासन को केवल एक करोड़ 65 लाख 28 हजार रुपये राजस्व मिलने का प्रतिवेदन भेजा था।

यह जानकारी पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े को सूचना के अधिकार के तहत मिली। उपसंचालक खनिज विभाग से दोनों ही वित्तीय वर्ष के लिए आरंग जनपद को 2,417 रायल्टी बुक जारी की गई थी। शासन द्वारा निर्धारित दर 20 रुपये प्रति घनमीटर के हिसाब से छह करोड़ 4 लाख 25 हजार रुपये का राजस्व जनपद को मिला था। लेकिन शासन को कम राजस्व का प्रतिवेदन दिया गया था।

जनपद पंचायत आरंग के वर्तमान सीईओ सीपी मनहर, पूर्व सीईओ पंकज देव (वर्तमान सीईओ जनपद पंचायत सिमगा), बाबू सत्यनारायण चंद्राकर, ग्राम पंचायत सचिव भोजराज कुर्रे, सतीश नारंग, मनोज ढिरहे, नील कुमार साहू, राकेश बंजारे, यशवंत टंडन, गोपाल चंद्राकर, धरम बंजारे आदि को निलंबन किया गया था।

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