नई दिल्ली, BMW Layoffs; जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता BMW ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने 2027 तक दुनिया भर में करीब 8,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की योजना बनाई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि यह छंटनी जबरन नहीं, बल्कि स्वैच्छिक (Voluntary Redundancy) योजना के तहत होगी, यानी जो कर्मचारी अपनी इच्छा से कंपनी छोड़ना चाहेंगे, उन्हें सेवरेंस पैकेज (मुआवजा) दिया जाएगा। यह कदम कंपनी ने बढ़ते खर्चों को कम करने और कारोबार को अधिक कुशल बनाने के लिए उठाया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
8,000 कर्मचारियों की कमी
BMW के मुताबिक, यह योजना मुख्य रूप से जर्मनी में प्रशासन (Administration) और रिसर्च एवं डेवलपमेंट (Development) विभागों के कर्मचारियों पर लागू होगी। कंपनी ने साफ किया है कि मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और उत्पादन से जुड़े कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल, BMW के दुनिया भर में करीब 1.5 लाख कर्मचारी हैं, इसलिए 8,000 कर्मचारियों की कमी कुल वर्कफोर्स का एक छोटा हिस्सा होगी।
BMW की कमाई पर बढ़ा दबाव
कंपनी के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह चीन के बाजार में कमजोर मांग है। हाल के महीनों में चीन में कारों की बिक्री उम्मीद से काफी कम रही है, जिससे BMW की कमाई पर दबाव बढ़ा है। इसी कारण जून 2026 में कंपनी ने अपने मुनाफे के अनुमान (Profit Outlook) को भी घटा दिया था। इसके बाद BMW ने खर्चों में कटौती और संचालन को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया।
BMW के सीईओ ने क्या कहा?
BMW के सीईओ मिलान नेदेल्जकोविक पहले ही संकेत दे चुके थे कि कंपनी लागत कम करने के लिए कई कदम उठाएगी। अब उसी रणनीति के तहत कर्मचारियों की संख्या घटाने का फैसला लिया गया है। कंपनी का कहना है कि वह उत्पादन प्रभावित किए बिना प्रशासनिक खर्च कम करना चाहती है, ताकि भविष्य में मुनाफा बेहतर बनाया जा सके।
दरअसल, BMW अकेली कंपनी नहीं है, जो इस तरह के कदम उठा रही है। दुनियाभर की कई बड़ी ऑटो कंपनियां, खासकर चीन में कमजोर मांग और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण, अपने खर्चों की समीक्षा कर रही हैं। ऐसे में BMW का यह फैसला भी उसी वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले समय में कंपनी का फोकस लागत घटाने, कारोबार को मजबूत बनाने और बदलते ऑटो बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रखने पर रहेगा।
