CJP फाउंडर अभिजीत दीपके को धमकियों का दावा, परिवार ने बताया कैसे बदले हालात; पेपर लीक आंदोलन की पूरी कहानी

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मुंबई। पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी को फाउंडर अभिजीत दीपके के पैरेंट्स अब उनकी शादी की तैयारियां शुरू करने जा रहे हैं। हालांकि, इसका फैसला उन्होंने अभिजीत पर ही छोड़ रखा है। हाल ही में एक अखबार से बातचीत में उन्होंने सीजेपी के बनने के बाद हुए अनुभवों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के बनने के बाद वह दो हफ्तों तक छिपे रहे थे।

मीडिया से बातचीत में अभिजीत की मां अनीता दीपके ने बताया कि सीजेपी के लॉन्च होने के बाद वह दो हफ्ते तक छिपे रहे। साथ ही धमकियां मिलना भी शुरू हो गईं थीं। उन्होंने कहा, ‘पार्टी के लॉन्च होने के बाद अभिजीत को बॉस्टन में धमकियां मिलने लगी थीं। कॉल करने वाले धमकी देते थे कि वह बॉस्टन में है, तो यहां उसके पैरेंट्स के निशाना बनाया जाएगा।’ उन्होंने अखबार को बताया, ‘अभिजीत ने हमें तुरंत कॉल किया और कहीं जाने की अपील की। हम कोंकण चले गए और दो सप्ताह तक रिश्तेदारों के साथ रहे। जब वह जून के पहले हफ्ते में बॉस्टन से लौटा, तो हम उसे लेने गए थे।’ रिपोर्ट के अनुसार, दीपके का परिवार छत्रपति संभाजीनगर के वालुज क्षेत्र में रहता है।

उन्होंने कहा कि अभिजीत ने कभी भी राजनीति के बारे में नहीं बताया था। उन्होंने कहा, ‘उसने कभी हमें कॉकरोच जनता पार्टी के लॉन्च होने के बारे में नहीं बताया था। हमने जब उसके इंटरव्यू देखे, तब सबकुछ न्यूज चैनल से पता चला।’

सीजेपी फाउंडर दीपके ने हाल ही में एक्स पर आरोप लगाया कि पुलिस अब भी छात्रों को परेशान कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसपर रोक नहीं लगी, तो ‘बहुत बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ किया जाएगा। दीपके ने कहा, ‘अगर पुलिस छात्रों को परेशान करती रही, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही बड़ा शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगी। सरकार को छात्रों को निशाना बनाने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगानी चाहिए।’ सीजेपी ने जंतर-मंतर पर 36 दिन तक चला आंदोलन शनिवार को खत्म कर दिया था। पार्टी ने कहा था कि सरकार ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, प्राथमिकियां वापस लेने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बदले की कार्रवाई न करने और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर विचार करने समेत प्रमुख मांगें मान ली हैं। सोमवार को संगठन ने गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने, सभी आपराधिक मामले वापस लेने और यह लिखित आश्वासन देने की मांग की थी कि कोई नई प्राथमिकियां दर्ज नहीं की जाएगी। साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा।

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