तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि डीएमके ने पिछले साल करूर में हुई भगदड़ की दुखद घटना से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की और उन्हें जिले का दौरा करने से भी रोका। भगदड़ के बाद पहली बार करूर आए विजय ने पुलिस की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उसने 27 सितंबर को तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) की सभा के आयोजन स्थल पर उन्हें बढ़ती भीड़ के बारे में न तो आगाह किया और न ही भीड़ के बेकाबू होने पर सभा रद्द करने का कोई कदम उठाया।
विजय ने कहा, ‘पुलिस हमें बता सकती थी कि भीड़ लगातार बढ़ रही है और उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो गया है। पुलिस के पास सभा रद्द करने का पूरा अधिकार था। लेकिन ऐसा करने के बजाय पुलिस हमें अपनी सुरक्षा में राजमार्ग तक ले गई।’ मई में मुख्यमंत्री पद संभालने वाले विजय 2025 में करूर जाकर भगदड़ से पीड़ित 41 परिवारों से नहीं मिल सके थे। बाद में उन परिवारों को चेन्नई के पास लाया गया, जहां उन्होंने स्वयं उनसे मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
पूरे घटनाक्रम की सच्चाई नहीं पता थी: विजय
शुक्रवार को आयोजित सभा में मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मुझे पुलिस पर पूरा भरोसा था। मैंने मंच से पुलिस का धन्यवाद भी किया था। मुझे उस समय इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई का पता नहीं था। यह सब किसकी जिम्मेदारी थी? किसके निर्देश पर यह सब किया गया?’ विजय ने उस समय सत्ता में रही डीएमके का नाम लिए बगैर कहा, ‘उन्होंने इस त्रासदी से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश की।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि करूर भगदड़ से उन्हें काफी पीड़ा हुई। उन्होंने कहा कि 2025 की करूर भगदड़ में हमारी बहनों ने अपने बच्चों को खो दिया।
काले कपड़े में करूर पहुंचे विजय
काले रंग के कपड़े में पहुंचे मुख्यमंत्री विजय ने घोषणा की कि उनकी पार्टी टीवीके करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में एक स्मारक का बनवाएगी। इसके बाद उन्होंने करूर में रोड शो भी किया। सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए मौजूद थे। विजय ने हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। इससे पहले, राज्य के मंत्री और टीवीके के महासचिव एन. आनंद ने बताया कि कार्यक्रम में केवल क्यूआर कोड से प्रवेश का पास रखने वाले 5,000 लोगों को आने की अनुमति होगी। उन्होंने लोगों से पुलिस के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की थी।
करूर से कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने इस दुखद घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले पीड़ित 41 परिवारों के दर्द को असहनीय बताया। उन्होंने कहा कि मुआवजे की कोई भी राशि इनके आंसूओं को नहीं पोंछ सकती। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘हम सभी जानते हैं कि केवल नौकरी का नियुक्ति पत्र उनके जीवन को वापस नहीं ला सकता। लेकिन हमें इन परिवारों के सामने मौजूद मौजूदा संघर्ष को भी समझना होगा। मृतकों में से कई अपने परिवारों की आय का एकमात्र साधन थे। वे साधारण और हाशिए पर रहने वाले लोग थे।’ सांसद ने मुख्यमंत्री के दौरे को राजनीति से प्रेरित बताने और इससे करूर भगदड़ मामले की CBI जांच प्रभावित होने का आरोप लगाने वाले विपक्षी दलों की आलोचना के बीच राज्य सरकार के फैसले का बचाव किया।
