नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) गिरने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर जमकर हमला बोला। महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पारित नहीं हो सका, जिससे केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा। बिल को पारित करने के लिए जरूरी बहुमत से यह 54 वोट पीछे रह गया। इस पर अमित शाह ने विपक्ष को महिलाओं के साथ धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि यह विपक्षी दलों का विश्वासघात है।
अमित शाह का ट्वीट:
अमित शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा, “देश की आधी आबादी, 70 करोड़ महिलाओं को धोखा देने और उनका विश्वास खोने के बाद कोई कैसे विजय का जश्न मना सकता है?” गृह मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि यह घटना महिलाओं के अधिकारों से जुड़ी एक गंभीर नाइंसाफी है, और इस पर विपक्ष का जश्न मनाना निंदनीय है।
विपक्ष पर तीखा हमला:
अमित शाह ने कहा, “विपक्ष का यह जश्न हर उस महिला का अपमान है, जो दशकों से अपने अधिकारों का इंतजार कर रही है। कई बार विजय जैसी प्रतीत होने वाली अहंकार की खुशी, असलियत में छिपी हुई एक बड़ी पराजय होती है, जिसे कुछ लोग समझ नहीं पाते।” उन्होंने इस घटनाक्रम को न केवल महिला आरक्षण के मुद्दे पर हार बताया, बल्कि सभी महिलाओं की उम्मीदों और समान प्रतिनिधित्व के अधिकार पर भी एक बड़ा हमला माना।
विपक्षी दलों का जश्न:
लोकसभा में बिल के गिरने के बाद विपक्षी दलों के बीच जश्न का माहौल था। कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने इसे अपनी जीत करार दिया। विपक्ष ने इसे सरकार की असफलता और अपने राजनीतिक लाभ के रूप में देखा। लेकिन अमित शाह ने इन दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को खारिज करना और इसके गिरने पर जश्न मनाना वास्तव में महिलाओं का अपमान है।
नितिन नवीन का बयान:
भा.ज.पा. के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने महिला विरोधी रुख अपनाया और देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है।” नितिन नवीन ने यह भी कहा कि यह एक सुनहरा मौका था जब महिलाएं संसद में अपनी भागीदारी बढ़ा सकती थीं, लेकिन विपक्ष ने इसे बेकार कर दिया।
बिल की गिरावट और आंकड़े:
महिला आरक्षण बिल पारित कराने के लिए 352 वोटों का समर्थन जरूरी था, लेकिन यह 54 वोट से पीछे रह गया। बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े, और इसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को बड़ा झटका दिया। यह पिछले 12 सालों में पहली बार था जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल संसद में गिरा है।
महिला आरक्षण बिल का महत्व:
यह बिल महिलाओं के लिए 33% आरक्षण प्रदान करने का था, जिसका उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाना था। महिला आरक्षण का यह बिल लंबे समय से महिला सशक्तिकरण और समान प्रतिनिधित्व के लिए एक आवश्यक कदम माना जा रहा था। लेकिन इसके गिरने से महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी विफलता देखी गई।
