पिस्टल दिखाकर 20 लाख की फिरौती मांगने वाले निकले फर्जी पुलिस! मरवाही में असली पुलिस ने 3 दिन में किया बड़ा खुलासा

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बिलासपुर। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम उषाढ़ में व्यापारी के अपहरण के मामले का पुलिस ने तीन दिन के भीतर पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने अपहृत गिरीश यादव को सकुशल बरामद करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि अपहरण की वजह गांजा तस्करी से जुड़े कमीशन का विवाद था। पुलिस के अनुसार अपहृत व्यापारी भी अवैध कारोबार में आरोपितों का सहयोगी रहा था और हिस्से की रकम नहीं देने पर विवाद बढ़ गया। इसके बाद आरोपितों ने योजना बनाकर उसका अपहरण कर लिया।

पुलिस के अनुसार 20 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे ग्राम उषाढ़ निवासी गिरीश यादव (41) को दो युवक पिस्टल दिखाकर उसके घर से जबरन बलेनो कार में बैठाकर ले गए। घटना की शिकायत उसकी पत्नी ने थाना मरवाही में दर्ज कराई। मामले में बीएनएस और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया।

जांच के दौरान अपहृत के घर में छूटे मोबाइल पर कॉल कर 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई और जान से मारने की धमकी दी गई। अधिकारियों के निर्देश पर जिला साइबर सेल एवं थाना मरवाही की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, काल डिटेल, टावर लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच की। विभिन्न राज्यों में टीम भेजकर अपहृत को सुरक्षित बरामद किया गया। गिरफ्तार आरोपितों में महाराष्ट्र निवासी पुंडलिक केंद्रे, राजस्थान निवासी चंद्रेशेखर और उत्तर प्रदेश निवासी शेषपाल सिंह शामिल हैं। पुलिस अन्य फरार आरोपितों की तलाश कर रही है।

अपहरण की घटना के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपहृत की सुरक्षित बरामदगी थी। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अपहृत का मोबाइल घर में ही छूट गया था और उसी मोबाइल पर फिरौती की मांग के लिए काल किए जा रहे हैं। पुलिस ने तुरंत काल डिटेल रिकार्ड निकलवाया और संबंधित मोबाइल नंबरों की गतिविधियों का विश्लेषण शुरू किया।

साइबर सेल की मदद से मोबाइल लोकेशन, टावर डंप और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ा गया। आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले गए। इसके आधार पर आरोपितों की आवाजाही और संभावित ठिकानों की जानकारी मिली। पुलिस ने अंतरराज्यीय समन्वय बनाते हुए अलग-अलग राज्यों में टीम रवाना की। लगातार ट्रैकिंग के बाद अपहृत गिरीश यादव को सुरक्षित बरामद किया गया और तीन आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें पूरे मामले का खुलासा हुआ।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की है। इनमें एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस, छह मोबाइल और एक स्कार्पियो एन वाहन शामिल है। विशेष बात यह रही कि वाहन में नीली बत्ती लगी थी और उस पर पुलिस लिखा हुआ प्लेट भी लगाया गया था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि वाहन का उपयोग पहले किसी अन्य वारदात में तो नहीं किया गया। बरामद मोबाइल फोन की जांच कर काल रिकार्ड, चैट और संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि विवाद गांजा तस्करी से जुड़े कमीशन के बंटवारे को लेकर था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। फरार आरोपितों की तलाश भी जारी है।

इस कार्रवाई में आइजी रामगोपाल गर्ग के निर्देशन और एसपी मनोज खिलारी के मार्गदर्शन में संयुक्त टीम ने काम किया। टीम का नेतृत्व एएसपी अविनाश कुमार मिश्रा ने किया। कार्रवाई में एसडीओपी मरवाही राजेश देवांगन, निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह, निरीक्षक अंजना केरकट्टा, उप निरीक्षक श्यामलाल गढ़ेवाल, सुरेश ध्रुव, सनत मात्रे, नवीन मिश्रा, साइबर सेल प्रभारी मनोज हनोतिया, प्रधान आरक्षक रवि त्रिपाठी, आरक्षक दुष्यंत मसराम, उप निरीक्षक रोहित डहरिया, प्रशिक्षु उप निरीक्षक दुर्गेश, प्रशिक्षु उप निरीक्षक अमित कुमार साहू, प्रधान आरक्षक मनोरंजन कुजूर, जगदीश नामदेव, गुलाब प्रजापति, अजय सिंह, अशोक गौतम, आरक्षक राजेश शर्मा, मनोज मरावी, अशोक कुमार, अनिल पैकरा, चितर सारठे, दीपक पाण्डेय, महिला आरक्षक सरिता मरावी, नगर सैनिक भूपत सिंह, रोशन लहरे, निर्मला मिंज और सरोज मरावी की उल्लेखनीय भूमिका रही।

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