जांजगीर-चांपा। शादी का रिश्ता कराने के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का जांजगीर-चांपा साइबर थाना पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने मामले में लक्ष्मीनारायण उर्फ लाला साहू और सोनू साहू को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों हेडफोन और ब्लूटूथ डिवाइस की मदद से लड़की की आवाज में लोगों से बातचीत करते थे और शादी का रिश्ता तय कराने का भरोसा दिलाकर अलग-अलग बहाने से रकम अपने खातों में मंगवाते थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में आरोपियों के तार छत्तीसगढ़ के कई जिलों से जुड़े होने की बात सामने आई है।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब शिकायतकर्ता अजय राठौर के बैंक खाते में दो हजार रुपये जमा हुए। कुछ दिन बाद बैंक ने उनके खाते पर होल्ड लगा दिया। अचानक खाता होल्ड होने के बाद अजय राठौर ने बैंक से संपर्क कर कारण पूछा। उन्हें जानकारी मिली कि उनके खाते में आई रकम का संबंध साइबर ठगी की एक शिकायत से है। इसके बाद अजय राठौर ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए बैंक खाते में हुए लेनदेन और रकम भेजने वाले खातों से संबंधित जानकारी जुटाई। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को साइबर ठगी के एक नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली।
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने लक्ष्मीनारायण उर्फ लाला साहू और सोनू साहू की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक पूछताछ और जांच में सामने आया कि आरोपी शादी का रिश्ता तलाश रहे लोगों को निशाना बनाते थे। लोगों का विश्वास जीतने के लिए वे लड़की की आवाज में बातचीत करने का तरीका अपनाते थे। आरोप है कि हेडफोन और ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल कर दोनों लोगों से लड़की बनकर बातचीत करते थे। इसके बाद शादी के लिए रिश्ता तय कराने और आगे बातचीत बढ़ाने का भरोसा दिया जाता था। जब सामने वाला व्यक्ति उनकी बातों पर विश्वास करने लगता, तब अलग-अलग कारण बताकर उससे रुपये मांगे जाते थे। रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा कराई जाती थी।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि वे वर्ष 2025 से इस तरह की गतिविधि में शामिल थे। इसके लिए ‘पवित्र रिश्ता डॉट कॉम’ नाम का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से इस नाम से संबंधित पंपलेट और फ्लेक्सी जब्त किए हैं। जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन की भी पड़ताल की। उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, हेडफोन और व्हाट्सएप चैटिंग से जुड़े डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। पुलिस इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने कितने लोगों से संपर्क किया था और कितने लोग उनके कथित ठगी के जाल में फंसे।
आरोपियों के बैंक खातों और साइबर क्राइम पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करने पर कई अन्य साइबर ठगी की शिकायतों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इसके आधार पर पुलिस को आशंका है कि ठगी का दायरा बड़ा हो सकता है और जांच आगे बढ़ने पर पीड़ितों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। पुलिस जांच में आरोपियों के तार कवर्धा, रायपुर, बलौदाबाजार, बालोद और महासमुंद सहित छत्तीसगढ़ के कई जिलों से जुड़े होने की जानकारी भी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन जिलों में आरोपियों के सहयोगी सक्रिय थे या वहां के लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया था। संबंधित बैंक खातों में हुए लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
