विधायक कॉलोनी के लिए चला बुलडोजर! नकटी गांव के 85 मकानों पर प्रशासन का एक्शन, 1600 लोगों के सामने बेघर होने का संकट

प्रादेशिक मुख्य समाचार

रायपुर एयरपोर्ट के पास स्थित नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। 48 घंटे की मोहलत खत्म होने के बाद भारी पुलिस बल, 14 बुलडोजर और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। विधायक निवास परियोजना के लिए 85 मकानों को हटाया जा रहा है।

रायपुर एयरपोर्ट के पास स्थित नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। गांव खाली करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था। समय पूरा होने के बाद प्रशासन भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ मौके पर पहुंचा। सुबह से ही गांव में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ग्रामीण विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी है। जिस गांव में करीब 1600 लोगों की आबादी रहती है, वहां अब 85 मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

14 बुलडोजर, 4000 जवान

प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए पूरे इंतजाम किए हैं। मौके पर करीब 4000 पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। इनके अलावा 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और लगभग 300 टीम प्रहरी भी कार्रवाई में लगाए गए हैं। गांव के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया गया है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। बड़ी संख्या में राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं और पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

विधायक निवास बनाने खाली हो रही जमीन

प्रशासन का कहना है कि नकटी गांव की जिस जमीन पर कार्रवाई हो रही है, वहां प्रस्तावित विधायक निवास परियोजना को शासन की स्वीकृति मिल चुकी है। इसी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है। प्रशासन का दावा है कि नियमानुसार नोटिस देने और समय सीमा पूरी होने के बाद ही कार्रवाई शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि को परियोजना के लिए मुक्त कराना जरूरी है।

पुश्तैनी जमीन पर चला बुलडोजर?

दूसरी ओर ग्रामीण प्रशासन की कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वजों के समय से उनके कब्जे में है और वे वर्षों से यहां रह रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी बात सुने बिना प्रशासन जबरन कब्जा कर रहा है। कई परिवारों ने कार्रवाई रोकने की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। महिलाओं और बुजुर्गों ने भी मौके पर विरोध दर्ज कराया।

पीएम आवास देकर चला रहे बुलडोजर!

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मकानों को आज तोड़ा जा रहा है, उनमें से कई घर कुछ साल पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे। कई लोगों ने बैंक से लोन लेकर अपने घर तैयार किए थे और अब उन्हीं घरों को तोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार ने उन्हें पक्का घर बनाने के लिए सहायता दी, वहीं दूसरी तरफ अब उन्हीं घरों को उजाड़ा जा रहा है। इस विरोधाभास को लेकर गांव में भारी नाराजगी है।

प्रशासन का दावा

इधर जिला प्रशासन का दावा है कि नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था शुरू कर दी है। प्रशासन के अनुसार परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित EWS आवासों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जा रही है। आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है। 3 दिन पहले नकटी के प्रभावितों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की थी। बृजमोहन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना आवासों को नहीं तोड़ा जाएगा, और जरूरत पड़ी तो वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी चर्चा करेंगे।

विकास बनाम विस्थापन… आगे क्या होगा?

नकटी गांव की कार्रवाई ने विकास परियोजनाओं और विस्थापन के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। एक तरफ सरकार विधायक निवास जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाना चाहती है, तो दूसरी ओर सैकड़ों परिवार अपने आशियाने बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई जारी है और पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

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