राजस्थान में डिलीवरी के दौरान इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने जांच में सैंपल फेल होने के बाद एक कंपनी के इंजेक्शन की बिक्री और उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी है। यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और दवा नियंत्रण विभाग दोनों अलर्ट मोड में आ गए हैं।
बताया जा रहा है कि यह इंजेक्शन गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा शुरू कराने और डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्त्राव रोकने के लिए लगाया जाता है। जांच में इंजेक्शन में आवश्यक ऑक्सीटोसिन तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं पाया गया।
कौन-सा इंजेक्शन हुआ बैन?
ड्रग कंट्रोल विभाग के अनुसार:
- मैसर्स जैक्सन लेबोरेट्रीज प्रा. लि., अमृतसर द्वारा निर्मित
- TOCIN (Oxytocin Injection 5ml)
- जांच में सैंपल अमानक पाया गया
- ऑक्सीटोसिन कम्पोनेंट तय मानकों से कम मिला
इसके बाद विभाग ने राज्यभर में इस इंजेक्शन की बिक्री और उपयोग रोकने के निर्देश जारी किए हैं।
कोटा में हजारों महिलाओं को लगाया गया इंजेक्शन
जानकारी के अनुसार:
- कोटा मेडिकल कॉलेज में इसी कंपनी के 1 एमएल इंजेक्शन की खरीद हुई थी
- करीब 15 हजार इंजेक्शन सप्लाई किए गए
- 4 महीनों में लगभग 12,500 महिलाओं को इंजेक्शन लगाया गया
- संबंधित बैच संख्या I-7881 का सैंपल जांच में अमानक मिला
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसी अवधि में कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत की खबर भी सामने आई थी। हालांकि विभाग ने मौतों और इंजेक्शन के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
क्या होता है ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का उपयोग?
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन प्रसूति चिकित्सा में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसका उपयोग मुख्य रूप से:
- लेबर पेन शुरू कराने
- डिलीवरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने
- बच्चे के जन्म के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग रोकने
के लिए किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी गुणवत्ता में कमी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
ड्रग कंट्रोल विभाग ने शुरू की व्यापक जांच
मामला सामने आने के बाद विभाग ने कई कदम उठाए हैं:
- संबंधित इंजेक्शन के स्टॉक जब्त किए गए
- अस्पतालों और ड्रग स्टोर्स पर जांच शुरू
- कंपनी की अन्य दवाइयों के सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए
- इंजेक्शन के अन्य बैचों की भी टेस्टिंग होगी
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपयोग किए गए अलग बैच की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
पहले भी कई दवाइयां मिल चुकी हैं अमानक
करीब एक महीने पहले भी राजस्थान में कई दवाइयों के सैंपल फेल पाए गए थे।
इनमें शामिल थीं:
- कफ सिरप
- बैक्टीरियल इन्फेक्शन की दवाएं
- गठिया रोग में इस्तेमाल होने वाली दवाएं
इस लगातार सामने आ रहे मामलों ने दवा गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
स्वास्थ्य सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भवती महिलाओं और नवजातों से जुड़े इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी जरूरी है। ऐसे मामलों में समय पर जांच और कार्रवाई मरीजों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
