PM मोदी की अपील के बाद पेट्रोल-डीजल पर सरकार ने दिए बड़े संकेत, ग्राहकों को लग सकता है झटका!
भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल और LPG की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हालांकि, तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिए हैं कि लगातार बढ़ते घाटे के कारण आने वाले समय में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। पीएम मोदी ने हाल ही में इस सबको लेकर लोगों से अपील की है।
देश में ईंधन की कमी की अफवाहों और बढ़ती कीमतों को लेकर मची हलचल के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति साफ कर दी है। 12 मई को आयोजित CII एनुअल बिजनेस समिट 2026 में बोलते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने भविष्य में कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत भी दे दिए हैं। आइए इस स्थिति को जरा विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।
ईंधन की कमी की खबरों को किया खारिज
मंत्री पुरी ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत के पास कच्चे तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि सरकार ने LPG (रसोई गैस) का उत्पादन बढ़ाकर 55,000-56,000 टन कर दिया है, जो पहले लगभग 35,000 टन था।
स्टोरेज की स्थिति
भारत के पास वर्तमान में 60 दिनों का कच्चा तेल (Crude Oil), 60 दिनों की LNG और 45 दिनों की LPG का स्टॉक है। यह स्टॉक किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है, इसलिए किल्लत या ‘ड्राई आउट’ जैसी कोई बात नहीं है।
क्या बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
कीमतों के सवाल पर हरदीप सिंह पुरी ने बहुत ही सीधा और गंभीर रुख अपनाया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं। मंत्री ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया कि हालिया राज्य विधानसभा चुनावों के कारण कीमतों में बढ़ोतरी को रोका गया था।
मंत्री ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा कि कीमतें नहीं बढ़ेंगी। मैं बस यह कह रहा हूं कि कीमतों और चुनावों का आपस में कोई संबंध नहीं है।
तेल कंपनियों की हालत चिंताजनक
मंत्री ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) इस समय भारी वित्तीय दबाव में हैं। वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध (पश्चिम एशिया संकट) के कारण कच्चे तेल की लागत बढ़ गई है, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कंपनियों ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। तेल कंपनियां वर्तमान में ₹1,000 करोड़ प्रतिदिन का घाटा झेल रही हैं। पिछले साल कंपनियों ने जो भी मुनाफा कमाया था, वह मौजूदा नुकसान के कारण खत्म हो रहा है। इस तिमाही में कंपनियों का घाटा ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण और भावी कदम
हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हवाला देते हुए कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर युद्ध और तनाव जारी रहता है, तो देश की अर्थव्यवस्था (Fiscal Strain) को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं को अचानक लगने वाले झटकों से बचाना है, लेकिन तेल कंपनियों की वहन करने की क्षमता भी एक सीमा तक ही है।
मंत्री के बयान से यह साफ है कि देश में तेल और गैस की कमी तो नहीं है, लेकिन वैश्विक बाजार के दबाव के कारण बहुत जल्द आपकी जेब पर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों का बोझ बढ़ सकता है। सरकार अब तक नुकसान सहकर जनता को बचा रही थी, लेकिन अब संतुलन बनाने के लिए दाम बढ़ाना उनकी मजबूरी हो सकती है।
