नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके से भारी टैरिफ लगाया जाएगा। 1 अगस्त 2026 से अगले दो साल तक इन दवाओं पर कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। इसके बाद अगस्त 2028 से टैरिफ 100% और अगस्त 2029 से 200% कर दिया जाएगा। यह नियम केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगा, जबकि ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं की मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। ट्रंप का कहना है कि इससे दवाओं का उत्पादन अमेरिका में बढ़ेगा और विदेशी देशों पर निर्भरता कम होगी।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत को दुनिया की ‘फार्मेसी’ कहा जाता है और वह अमेरिका को सबसे ज्यादा जेनेरिक दवाएं निर्यात करता है। जीटीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने अमेरिका को करीब 9.7 अरब डॉलर की दवाएं भेजीं। नए टैरिफ लागू होने के बाद भारतीय दवा कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में कारोबार करना महंगा हो सकता है। इससे उनके मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा और कई कंपनियों को अमेरिका में ही उत्पादन इकाइयां लगाने पर विचार करना पड़ सकता है।
फार्मा कंपनियों के सामने नई चुनौती
Sun Pharma, Cipla, Lupin, Dr. Reddy’s और Aurobindo Pharma जैसी कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। अमेरिका में फैक्ट्री लगाने से उत्पादन लागत बढ़ेगी, जबकि भारत में रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही कंपनियां अब यूरोप, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे नए बाजारों पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं। ट्रंप के ऐलान के बाद भारतीय फार्मा शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।
