नयी दिल्ली, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों और 5 किलोग्राम वाले बिना सब्सिडी वाले सिलेंडरों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है।
माकपा पोलित ब्यूरो ने प्रेस बयान में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में लगभग 1,000 रुपये की बढ़ोतरी को ‘अभूतपूर्व’ बताते हुए आगाह किया कि कारोबारी इस अतिरिक्त बोझ को निश्चित रूप से ग्राहकों पर डाल देंगे। बयान में कहा गया, “कमर्शियल संस्थानों के लिए यह जरूरी हो जायेगा कि वे इस बोझ को ग्राहकों पर डाल दें, जिससे उन पर और महंगाई का बोझ बढ़ेगा।” बयान में यह भी कहा गया कि इसका महंगाई, रोजगार और कमजोर तबकों की आजीविका पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। वहीं कई छोटे कारोबार बंद हो जायेंगे, जिससे छंटनी और नौकरियों का नुकसान होगा।
माकपा ने 5 किलोग्राम वाले बिना सब्सिडी वाले सिलेंडरों की कीमतों में 261 रुपये की बढ़ोतरी की आलोचना करते हुये कहा कि इसका सबसे अधिक असर गरीब परिवारों और प्रवासी मजदूरों पर पड़ेगा। पार्टी ने कहा, “5 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की कीमतों में इस बेरहम बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर छोटे परिवारों और प्रवासी मजदूरों पर पड़ेगा, जो 14 किलोग्राम वाले सिलेंडर खरीदने की हैसियत न होने के कारण इनका इस्तेमाल करते हैं।”
पार्टी ने हालांकि यह भी कहा कि 14 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडरों की कीमतें फिलहाल नहीं बढ़ाई गयी हैं लेकिन उसने तर्क दिया कि यह ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुयी है जब जरूरी चीजों की कीमतें पहले से ही बढ़ रही हैं। पार्टी ने दावा किया कि बढ़ती कीमतों और खाना पकाने वाली गैस की कमी के कारण कई प्रवासी मजदूर पहले ही अपने गांवों को लौटने लगे हैं। पार्टी ने चेतावनी दी कि इस ताजा बढ़ोतरी से हालात और भी बदतर हो जायेंगे। अब इस भारी बढ़ोतरी के बाद और भी अधिक लोग घर लौटने पर मजबूर हो जायेंगे।
माकपा ने केंद्र सरकार पर गरीब विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने पिछले दो महीनों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी की है। पार्टी ने कहा कि सरकार ने सिलेंडरों पर टैक्स में कटौती नहीं की, जिससे आम ग्राहकों को राहत मिल सकती थी।
पार्टी ने कीमतों में की गयी बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुये देशभर में अपनी इकाइयों से इस बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया। पार्टी ने इस मुद्दे को बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ चल रहे व्यापक संघर्ष का एक हिस्सा बताया।
