मध्य प्रदेश : इंदौर में ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) बीमारी लगातार गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद शहर में इस संक्रामक रोग के मामलों में कमी नहीं आ रही है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार 01 जनवरी से 30 अप्रैल 2026 के बीच केवल चार महीनों में इंदौर में टीबी के 3,004 नए मामले दर्ज किए गए हैं।
यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बीमारी का फैलाव अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। जिला ट्यूबरकुलोसिस अधिकारी डॉ. शैलेंद्र जैन के मुताबिक सभी मरीजों का इलाज सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत निःशुल्क किया जा रहा है और नियमित जांच भी की जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज किए गए कुल मामलों में 2,785 वयस्क मरीज हैं, जबकि 219 मरीज नाबालिग हैं। यह स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि टीबी अब बच्चों और किशोरों को भी प्रभावित कर रही है। वयस्क मरीजों में 1,528 पुरुष और 1,474 महिलाएं शामिल हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बीमारी किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इसी चार महीने की अवधि में इलाज के दौरान 28 टीबी मरीजों की मौत भी हुई है। अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में मौत का कारण दवाओं का नियमित सेवन न करना या इलाज बीच में छोड़ देना पाया गया है।
डॉ. जैन ने कहा कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए मरीजों का समय पर और लगातार दवा लेना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि यदि मरीज बिना किसी रुकावट के निर्धारित उपचार प्रक्रिया का पालन करें, तो टीबी आमतौर पर छह महीने में ठीक हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। लोगों को शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर जांच करानी चाहिए। साथ ही इलाज के दौरान दवा का पूरा कोर्स लेना अनिवार्य है, ताकि बीमारी दोबारा न लौटे और संक्रमण का फैलाव रोका जा सके।
प्रशासन ने भी अपील की है कि लोग टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। लगातार निगरानी और सही इलाज से ही इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
