ओवरचार्जिंग पर बड़ी कार्रवाई, 2 रुपये ज्यादा लेने पर रेस्टोरेंट को 1 लाख 6 हजार चुकाने का आदेश

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नई दिल्ली। एक रेस्टोरेंट को पानी की बोतल पर 2 रुपये ज्यादा वसूलना महंगा पड़ गया। उसे अब इसके बदले में एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। आपको बता दें कि यह मामला उत्तर प्रदेश के हाथरस का है। अलीगढ़ के एक कंज्यूमर फोरम ने यह फैसला सुनाया है। रेस्टोरेंट के मालिक को उपभोक्ता कल्याण कोष में 1 लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया है। फोरम के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत ने रेस्टोरेंट को शिकायतकर्ता को उत्पीड़न के लिए मुआवजे के तौर पर 1,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया है।

आदेश में कहा गया, “हम विपक्षी पार्टी यानी कि रेस्टोरेंट को निर्देश देते हैं कि वह शिकायतकर्ता को 1,000 रुपये का मुआवजा और 5,000 रुपये का कानूनी खर्च दे। विपक्षी पार्टी को अधिनियम की धारा 39(1)k के तहत 1,00,000 रुपये की राशि का भुगतान करने का भी निर्देश दिया जाता है, जिसे उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा किया जाएगा।”

यह शिकायत अलीगढ़ के रहने वाले ने दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वे 11 मार्च 2026 को रेस्टोरेंट गए थे। उनकी शिकायत के अनुसार, जब उन्होंने खाने के दौरान पानी मांगा तो उन्हें 18 रुपये MRP वाली पैक्ड पानी की बोतल दी गई, लेकिन उनसे 20 रुपये वसूले गए। परेशान होकर, शिकायतकर्ता ने मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की। इसके साथ ही कानूनी खर्च के लिए 15,000 रुपये की मांग की।

नोटिस मिलने के बावजूद रेस्टोरेंट ने कार्यवाही का विरोध नहीं किया जिसके बाद आयोग ने 21 मई, 2026 को उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की। आयोग ने 11 मार्च, 2026 के बिल की जांच की, जिसमें दिखाया गया था कि रेस्टोरेंट ने पानी की बोतल के लिए 20 रुपये वसूले थे, साथ ही बोतल की एक तस्वीर भी देखी जिसमें 18 रुपये MRP दिखाई दे रही थी।

आयोग ने पाया कि इस बात का पर्याप्त सबूत था कि रेस्टोरेंट ने 18 रुपये MRP के बजाय 20 रुपये में पानी की बोतल बेची थी और इस तरह अनुचित व्यापार व्यवहार अपनाया था। आयोग ने कहा, “इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि संबंधित पक्ष ने पानी की बोतल MRP 18 रुपये के बजाय 20 रुपये में बेची थी। इस तरह, उन्होंने अनुचित व्यापार व्यवहार अपनाया है और वे धारा 39(1) k के तहत दंड के भागीदार हैं। शिकायतकर्ता उत्पीड़न के लिए 1,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के तौर पर 5,000 रुपये का मुआवजा पाने का हकदार है।”

आयोग ने रेस्टोरेंट को शिकायतकर्ता को 6,000 रुपये का भुगतान करने और उपभोक्ता कल्याण कोष में 1 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया। आयोग ने रेस्तरां को 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन करने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर निर्देशों का पालन न करने के कारण अधिनियम की धारा 72 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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