नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा है कि देश ने पेरिस समझौते के तहत COP21 में तय किए गए जलवायु लक्ष्यों को निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत ऐसा करने वाला G20 समूह का पहला देश है।
भारत की यह प्रगति मुख्य रूप से गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, सौर ऊर्जा के विस्तार और उत्सर्जन तीव्रता में कमी जैसे क्षेत्रों में दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 में देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो गई थी, जो 2030 के लिए निर्धारित NDC लक्ष्य से पांच साल से ज्यादा पहले हासिल हुई।
सौर ऊर्जा में कई गुना बढ़ी क्षमता
प्रधानमंत्री ने भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में हुए तेज विस्तार को भी रेखांकित किया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2014 में देश की सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता करीब 2.82 गीगावाट थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 150.26 गीगावाट हो गई। जून 2026 तक यह आंकड़ा 162.15 गीगावाट पहुंच चुका था।
जुलाई 2026 के अंत तक भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 164.59 गीगावाट दर्ज की गई। इसी अवधि में देश की कुल गैर-जीवाश्म आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 300.50 गीगावाट तक पहुंच गई।
भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रगति
- जून 2025 में गैर-जीवाश्म ऊर्जा की स्थापित क्षमता 50% के पार पहुंची।
- जून 2026 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54.18% हो गई।
- मार्च 2026 तक सौर ऊर्जा क्षमता 150.26 गीगावाट थी।
- जून 2026 में सौर क्षमता बढ़कर 162.15 गीगावाट हो गई।
- जुलाई 2026 के अंत तक कुल गैर-जीवाश्म क्षमता 300.50 गीगावाट दर्ज हुई।
उत्सर्जन तीव्रता में भी हुई कमी
भारत के जलवायु लक्ष्यों में केवल स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाना ही शामिल नहीं था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2005 के मुकाबले 2022 में भारत की GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 37.38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। 2030 के लिए लक्ष्य 45 प्रतिशत की कमी का था।
इसी तरह 2005 से 2022 के बीच भारत ने 2.44 अरब टन CO₂ समतुल्य अतिरिक्त कार्बन सिंक तैयार किया। 2030 तक 2.5 से 3 अरब टन CO₂ समतुल्य का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अब 2030 के बड़े लक्ष्य पर नजर
भारत ने शुरुआती जलवायु लक्ष्यों में प्रगति के बाद स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में आगे के लिए भी बड़े लक्ष्य निर्धारित किए हैं। सरकार 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का दीर्घकालिक लक्ष्य रखा है।
2026 में भारत की नई NDC के तहत 2035 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 47 प्रतिशत घटाने और कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य भी तय किया गया है।
इस तरह भारत की जलवायु नीति अब केवल पहले से तय लक्ष्यों को हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा क्षमता, सौर ऊर्जा और कम-कार्बन विकास के लिए अगले चरण के लक्ष्यों पर भी केंद्रित है।
