मुंबई, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत के प्रतिभूति बाज़ार की विकास यात्रा में बड़ी उपलब्धियों को को रेखांकित करते हुए कहा कि यह यात्रा उल्लेखनीय रही है और भारतीय बाजार आज एक मज़बूत, प्रौद्योगिकी-आधारित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र में सबसे अच्छे बाजारों में एक है।
वित्त मंत्री ने विश्वास और ईमानदारी को बाजार की अदृश्य लेकिन सबसे अहम अवसंरचना बताते हुए बाजार विनियामक सेबी से कदाचार के विरुद्ध बहुत कठोर रुख अपनाने को कहा।
श्रीमती सीतारमण ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के 38वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते कहा कि भारतीय बाज़ारों की यात्रा पारंपरिक ट्रेडिंग रिंग से निकल कर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ऑर्डर बुक तक, भौतिक शेयर प्रमाणपत्रों से पूर्ण डीमैटेरियलाइजेशन तक, और बिखरी हुई निगरानी से रीयल-टाइम नियामकीय पर्यवेक्षण तक पहुंच गयी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन बाज़ारों का आकार यात्रा की चुनौतियों से तय हुआ है और इस दौरान उत्पन्न दबावों और अस्थिरता के दौर ने नियमन और बाज़ार अवसंरचना को मज़बूत किया है।
उन्होंने कहा, “भारतीय बाज़ारों का इतिहास हमें पहले के दशकों के तनावपूर्ण दौर से महत्वपूर्ण सबक भी सिखाता है, जिससे मज़बूत नियमन विकसित हुआ। अस्थिरता के दौर ने बेहतर बाज़ार ढांचा बनाया, चुनौतियों ने बेहतर संस्थानों को जन्म दिया। इसी तरह परिपक्व वित्तीय प्रणालियाँ सीखते हुए, अनुकूलन करते हुए और अधिक मज़बूत बनकर उभरती हैं।”
सेबी की भूमिका को रेखांकित करते हुए सीतारमण ने कहा कि उसकी प्रभावशीलता केवल उसके अधिकारों की व्यापकता से नहीं, बल्कि उन्हें अनुशासन के साथ लागू करने से आती है।
उन्होंने उन्होंने कहा, “सेबी ने सभी सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के लिए टी 1 (ट्रेड प्लस वन) सेटलमेंट चक्र लागू करने में भारत का नेतृत्व किया, जो जनवरी 2023 में पूरा हुआ। इससे भारत कई बड़े बाज़ारों, जैसे अमेरिका, से आगे निकल गया, जिसने टी 1 को मई 2024 में अपनाया।”
ट्रेड प्लस वन निपटन चक्र” का अर्थ है कि प्रतिभूति लेनदेन एक कार्यदिवस के भीतर निपटाया जाता है, यानी शेयर और धनराशि अगले कार्यदिवस तक हस्तांतरित हो जाते हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि ” सेबी ने एएसबीए (एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट) प्रणाली भी शुरू की, जो आईपीओ के लिए एक वैश्विक नवाचार है, जिसने रिफंड चक्र को समाप्त कर दिया और निवेशक के बैंक खाते में केवल आवंटित राशि को ही ब्लॉक किया (खाते में रोका)।”
उन्होंने सेबी और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने मिलकर भारत को दुनिया का ऐसा पहला बाजार क्षेत्र बनाया, जहां यूपीआई के माध्यम से आईपीओ आवेदन संभव हुआ, जिससे प्राथमिक बाज़ारों में रीयल-टाइम खुदरा भागीदारी हर स्मार्टफोन तक पहुंची।
उन्होंंने कहा कि कि आज भारत दुनिया की सबसे उन्नत डिपॉजिटरी अवसंरचनाओं में से एक संचालित करता है, जिसमें नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड के पास पांच लाख करोड़ डॉलर से अधिक मूल्य की डीमैट प्रतिभूतियाँ हैं।
उन्होंने संस्थान की प्रभावशीलता दिखाने वाले कुछ आँकड़े भी साझा किए: “सेबी की सफलता दर सुप्रीम कोर्ट में 90 प्रतिशत से अधिक, सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल में 73 प्रतिशत और सिविल कोर्ट या एनसीएलटी में 92 प्रतिशतहै।” वित्त मंत्री ने कहा ‘ ये आँकड़े इसकी कानूनी संरचना की संस्थागत मज़बूती को दर्शाते हैं।’
“वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आईपीओ ( प्राथमिक शेयर निर्गम) गतिविधि मजबूत रही, 366 आईपीओ के माध्यम से लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई गई, जो नियामकीय समर्थन के कारण संभव हुआ। भारत में खुदरा भागीदारी की क्रांति हमारे वित्तीय इतिहास के सबसे लोकतांत्रिक विकासों में से एक है।”
हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती भागीदारी के साथ जागरूकता भी आवश्यक है।उन्होंने कहा, “समझ के बिना भागीदारी जोखिम पैदा कर सकती है, और सुरक्षा उपायों के बिना पहुंच खतरे उत्पन्न कर सकती है,” और जोर दिया कि निवेशक संरक्षण को रक्षात्मक से विकासात्मक कार्य में विकसित होना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि नियामक प्रणालियों का लक्ष्य अत्यधिक प्रतिबंध नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें अधिक परिष्कृत और पूर्वानुमानित बनना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सभी प्रमुख वैश्विक बाज़ारों ने अति और संकट के दौर देखे हैं, और संस्थागत ताकत का वास्तविक माप सुधारात्मक कदमों की गति और कठोरता में निहित है।
सीतारमण ने कहा कि विश्वास और ईमानदारी वित्तीय बाज़ारों की “अदृश्य अवसंरचना” हैं। उन्होंने कहा, “बाज़ार विश्वास पर चलते हैं, और विश्वास निष्पक्षता, पारदर्शिता, प्रवर्तन और पूर्वानुमान पर आधारित होता है,” और जोड़ा कि उभरते जोखिमों के बीच इस विश्वास को लगातार नवीनीकृत करना आवश्यक है।
कड़े प्रवर्तन की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि सेबी को कदाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उल्लंघनों की जांच और कार्रवाई लगातार की जाए। उन्होंने निगरानी प्रणालियों को उन्नत करने और समयबद्ध, सुलभ शिकायत निवारण तंत्र सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उभरती चिंताओं का उल्लेख करते हुए, मंत्री ने अपंजीकृत वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स पर सेबी की कार्रवाई का समर्थन किया और बिना जानकारी वाले खुदरा निवेशकों के विश्वास के व्यावसायीकरण के खिलाफ चेतावनी दी।
उन्होंने जिम्मेदार वित्तीय शिक्षा के लिए सक्षम ढांचा बनाने का आह्वान किया, साथ ही व्यक्तिगत लाभ के लिए बिना लाइसेंस वित्तीय सलाह पर शून्य सहनशीलता बनाए रखने पर जोर दिया।
