बारिश की भारी कमी से बढ़ी चिंता, जून सूखा तो जुलाई पर भी मंडराया संकट

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भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है। लगातार तीसरे साल जून में मानसून ने लंबा ब्रेक लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 4 जून से 18 जून के बीच बारिश की कमी बढ़कर 42% हो गई है। इस दौरान देश में सामान्य 72.2 mm बारिश के मुकाबले सिर्फ 42.1 mm बारिश हुई, जो मॉनसून शुरू होने के बमुश्किल दो हफ़्ते बाद ही इस मौसम के सामने बढ़ती चुनौती को दिखाता है।

देश के बड़े इलाके सूखे की ओर
ज़िलेवार बारिश का ताजा मैप चिंताजनक तस्वीर पेश करता है। मध्य, पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत के बड़े हिस्से बारिश की कमी (-20% से -59%) या बहुत ज़्यादा कमी (-60% से -90%) वाली कैटेगरी में आते हैं। सिर्फ़ उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ इलाकों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में ही जरूरत से ज्यादा बारिश हुई है।

हालात का सामान्य होना क्यों मुश्किल?
18 जून को INSAT-3DS से मिली सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि हालात का सामान्य होना मुश्किल क्यों बना हुआ है। तस्वीर में पश्चिमी हिमालय और उससे सटे उत्तरी इलाकों में बादलों का घना जमावड़ा दिख रहा है, जो एक सक्रिय ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) से जुड़ा है। वहीं, मध्य भारत, महाराष्ट्र, गुजरात और मॉनसून के मुख्य क्षेत्र का ज़्यादातर हिस्सा काफी हद तक बादलों से मुक्त है। अरब सागर वाली शाखा कमजोर लग रही है और पश्चिमी तट पर गहरे संवहन (deep convection) की गतिविधि सीमित है, जबकि बंगाल की खाड़ी वाली शाखा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कहीं-कहीं तूफानी बादलों के समूह बना रही है।

क्यों थम गई बारिश?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि देश भर में मॉनसून का सिस्टम अभी भी ठीक से जम नहीं पा रहा है। मॉनसून कई दिनों से लगभग रुका हुआ है क्योंकि ऊपरी वायुमंडल की स्थितियां इसे उत्तर की ओर बढ़ने से रोक रही हैं। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस (पश्चिमी विक्षोभ) ने बार-बार मॉनसून के सामान्य बहाव में रुकावट डाली है, जिससे नमी वाली हवाएं मध्य और उत्तर-पश्चिमी भारत के अंदरूनी इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। इन रुकावटों के कारण देश के ज़्यादातर हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की संभावना है।

मुंबई में पिछले एक दशक में जून का महीना सबसे सूखा
बारिश की कमी का असर ज़मीन पर दिखने लगा है। महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है, जबकि मुंबई में पिछले एक दशक में जून का महीना सबसे सूखा रहा है, जिससे अधिकारियों को पानी की खपत पर पाबंदियां लगानी पड़ी हैं। मध्य भारत के कुछ हिस्सों, जैसे विदर्भ और मध्य प्रदेश में भी मॉनसून के जोर पकड़ने का इंतजार किया जा रहा है।

रिकवरी की उम्मीद कमजोर
अब चुनौती सही समय की है। जून का तीसरा हफ़्ता चल रहा है, ऐसे में अब तक हुई बारिश की कमी को पूरा करने के लिए मॉनसून को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी, दोनों तरफ से मज़बूती से आगे बढ़ने की जरूरत है। हालांकि, सैटेलाइट से मिली मौजूदा तस्वीरों से पता चलता है कि मॉनसून में ऐसी तेजी अभी शुरू नहीं हुई है।

अगर अगले हफ्ते तक कोई मजबूत कम दबाव वाला सिस्टम नहीं बनता और नमी का बहाव काफी नहीं बढ़ता, तो जून के आखिर तक बारिश की कमी बनी रह सकती है, जिससे स्थिति का पूरी तरह से सामान्य होना और भी मुश्किल हो जाएगा।

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